पलामू : फसल बीमा का एक लाख चालीस हजार आवेदन फर्जी , DC की जांच में आया सामने
पलामू : फसल बीमा का एक लाख चालीस हजार आवेदन फर्जी , DC की जांच में आया सामने
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श्रवण पांडे / पलामू
पलामू जिले में फसल बीमा योजना में बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है। डीसी शशि रंजन की जांच में सामने आया कि कुल आवेदनों में से एक लाख 40 हजार फर्जी पाए गए। राज्य सरकार ने पलामू जिले के लिए एक लाख 17 हजार किसानों को फसल बीमा का लाभ देने का लक्ष्य रखा था, लेकिन कुल तीन लाख 10 हजार आवेदन प्राप्त हुए। इस अनियमितता को देखते हुए डीसी ने एक लाख 75 हजार आवेदनों की जांच का आदेश दिया, जिसमें से केवल 35 हजार ही सही पाए गए। शेष एक लाख 40 हजार आवेदनों में गड़बड़ी सामने आई।
योजना और लक्ष्य का विवरण
राज्य सरकार ने पलामू जिले में खरीफ फसल बीमा के लिए 1,17,000 किसानों को कवर करने का लक्ष्य निर्धारित किया था। यह बीमा एचडीएफसी ईरगो कंपनी के माध्यम से लागू किया जा रहा था। लेकिन हैरानी की बात यह है कि कुल 3,10,336 आवेदन जमा हुए, जो लक्ष्य से लगभग तीन गुना अधिक है। इस असामान्य वृद्धि ने डीसी का ध्यान आकर्षित किया, जिसके बाद गहन जांच शुरू हुई।
डीसी का कदम
डीसी शशि रंजन ने समीक्षा बैठक में बचे हुए आवेदनों की जांच एक सप्ताह में पूरी करने और रिपोर्ट जमा करने का निर्देश दिया। साथ ही, अधिकारियों से सवाल किया कि जब आच्छादित भूमि 67,308 हेक्टेयर है, तो तीन गुना से अधिक बीमा कैसे संभव हुआ। उन्होंने सभी अंचल अधिकारियों (सीओ) को 15 दिनों में विस्तृत रिपोर्ट देने को कहा था ।
जांच के परिणाम
डीसी ने 1,75,000 आवेदनों की जांच का आदेश दिया, जिसके लिए सभी अंचल अधिकारियों (सीओ) को जिम्मेदारी सौंपी गई। जांच में निम्नलिखित तथ्य सामने आए:
- केवल 35,000 आवेदन सही: कुल जांचे गए आवेदनों में से सिर्फ 20% ही वैध पाए गए।
- 30,000 डुप्लीकेट आवेदन: एक ही जमीन या किसान के नाम पर बार-बार आवेदन जमा किए गए।
- 29,000 किसानों का दोहरा लाभ: ये वे किसान थे जो पहले से ही किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) के तहत ऋण ले चुके थे और फिर भी बीमा के लिए आवेदन किया।
- 200 किसानों की धोखाधड़ी: इन किसानों ने अपनी वास्तविक जमीन से कहीं अधिक क्षेत्र का बीमा कराया, जैसे कि 5 एकड़ की जमीन को 5 हेक्टेयर (12.5 एकड़ से अधिक) दिखाया।
- 1,40,000 फर्जी आवेदन: कुल मिलाकर, जांचे गए आवेदनों में से 80% में गड़बड़ी पाई गई।
आच्छादित भूमि और बीमा में अंतर
कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार, पलामू जिले में कुल आच्छादित (कृषि योग्य) भूमि 67,308 हेक्टेयर है। लेकिन बीमा कंपनी ने 2,32,213.77 हेक्टेयर भूमि का बीमा दर्ज किया, जो वास्तविक आंकड़े से लगभग 3.5 गुना अधिक है। यह अंतर इस बात का संकेत है कि फर्जी तरीके से बीमा राशि हासिल करने की कोशिश की गई। डीसी ने अधिकारियों से सवाल किया कि जब जिले में इतनी कम खेती योग्य जमीन है, तो इतने बड़े पैमाने पर बीमा कैसे स्वीकार किया गया।
फर्जीवाड़े की तकनीक, जांच में फर्जीवाड़े के कई तरीके सामने आए:
- एक जमीन, कई आवेदन: एक ही खेत के लिए परिवार के सभी सदस्यों ने अलग-अलग आवेदन जमा किए। उदाहरण के लिए, यदि एक परिवार में 5 लोग हैं और उनके पास एक ही खेत है, तो उस खेत का 5 बार बीमा कराया गया।
- कुछ किसानों ने अपनी जमीन को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया। जैसे, 2 एकड़ की जमीन को 5 हेक्टेयर (12.5 एकड़ से अधिक) बताकर बीमा कराया।
- डुप्लीकेशन: एक ही दस्तावेज और जमीन के आधार पर बार-बार आवेदन जमा किए गए। प्रखंड-वार बीमा का आंकड़ा
- बीमा कंपनी के डेटा के अनुसार, विभिन्न प्रखंडों में बीमा दर्ज किया गया:
- चैनपुर: 41,835 आवेदन, 29,469.49 हेक्टेयर
- पांकी: 37,202 आवेदन, 30,655.80 हेक्टेयर
- हुसैनाबाद: 28,227 आवेदन, 21,270.59 हेक्टेयर
- पाटन: 23,500 आवेदन, 17,599.06 हेक्टेयर
- नौडिहा बाजार: 14,170 आवेदन, 12,318.04 हेक्टेयर (सभी प्रखंडों में आवेदन और बीमित क्षेत्र वास्तविकता से कहीं अधिक पाया गया।)
डीसी का सख्त रुख
- बैठक और निर्देश: डीसी की अध्यक्षता में हुई बैठक में बचे हुए आवेदनों की जांच एक सप्ताह में पूरी करने का आदेश दिया गया।
- 15 दिन की समयसीमा: सभी अंचल अधिकारियों को जमीन की वास्तविक जांच कर 15 दिनों में रिपोर्ट जमा करने को कहा गया।
- जवाबदेही तय करने की मांग: डीसी ने पूछा कि इतनी बड़ी गड़बड़ी कैसे हुई और इसके लिए जिम्मेदार कौन है।











