20250407 154002

पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ेंगी: सरकार ने उत्पाद शुल्क में 2 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि की घोषणा की

सरकार ने सोमवार को पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क में 2-2 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी करने का ऐलान किया। आज रात बारह बजे से से यह नया दर लागू हो जाएगा । रांची में यह पेट्रोल और डीजल 2 रुपये प्रति लीटर बढ़ेगा ।  ये फैसला ऐसे समय में लिया गया है, जब वैश्विक तेल बाजार में कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें कई कारकों से प्रभावित हो रही हैं, जिनमें मांग और आपूर्ति का असंतुलन, भू-राजनीतिक तनाव, और हाल ही में ट्रंप प्रशासन द्वारा कुछ देशों के खिलाफ जवाबी टैरिफ की घोषणा शामिल है।

WhatsApp Group Join Now
Telegram Group Join Now
Instagram Group Join Now
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!
वर्तमान में (अप्रैल 2025 तक), भारत सरकार द्वारा पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क निम्नलिखित है:
  • पेट्रोल: लगभग 19.90 रुपये प्रति लीटर
  • डीजल: लगभग 15.80 रुपये प्रति लीटर
ये दरें समय-समय पर सरकार की नीतियों के आधार पर बदल सकती हैं।  सरकार ने सोमवार को पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क में 2-2 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की घोषणा की है, जैसा कि आपने पहले बताया। इसके आधार पर, नई दरें इस प्रकार हो सकती हैं:
  • पेट्रोल: 19.90 + 2 = 21.90 रुपये प्रति लीटर
  • डीजल: 15.80 + 2 = 17.80 रुपये प्रति लीटर
  • वहीं रांची में पेट्रोल और डीजल की अंतिम कीमत में उत्पाद शुल्क के अलावा झारखंड सरकार का वैट, डीलर कमीशन, और अन्य लागतें भी जुड़ती हैं। झारखंड में वैट की दर पेट्रोल पर लगभग 22% और डीजल पर भी करीब 22% है, जो बेस प्राइस और उत्पाद शुल्क के ऊपर लागू होता है।

हाफ रहा अंडरग्राउंड केबलिंग योजना ! पवार कट से जनता बेहाल !
जाहिर है इस बढ़ोतरी के पीछे सरकार का मकसद राजस्व में वृद्धि करना है, क्योंकि उत्पाद शुल्क से प्राप्त आय केंद्र सरकार के लिए एक महत्वपूर्ण वित्तीय स्रोत है। हालांकि, इससे आम जनता पर बोझ बढ़ेगा, क्योंकि पेट्रोल और डीजल की कीमतों में वृद्धि का सीधा असर परिवहन, वस्तुओं की ढुलाई और रोजमर्रा की जरूरतों की लागत पर पड़ता है। भारत में ईंधन की कीमतें पहले से ही कई करों और शुल्कों से प्रभावित होती हैं, और यह नई बढ़ोतरी उपभोक्ताओं के लिए अतिरिक्त आर्थिक दबाव का कारण बनेगी।
वैश्विक संदर्भ में, तेल उत्पादक देशों के संगठन (OPEC) और अन्य प्रमुख तेल निर्यातक देशों की नीतियां भी कीमतों को प्रभावित कर रही हैं। ट्रंप प्रशासन के टैरिफ से संबंधित कदमों के जवाब में कुछ देश अपनी व्यापार रणनीतियों में बदलाव कर सकते हैं, जिसका असर तेल की आपूर्ति श्रृंखला पर पड़ सकता है। इस बीच, भारत जैसे तेल आयातक देशों के लिए यह स्थिति चुनौतीपूर्ण है, क्योंकि यहाँ ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयातित तेल से पूरा होता है। सरकार के इस फैसले से जहां एक ओर राजकोष को मजबूती मिल सकती है, वहीं दूसरी ओर महंगाई और आर्थिक गतिविधियों पर इसका नकारात्मक प्रभाव भी देखने को मिल सकता है।

Share via
Share via