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प्रधानमंत्री मोदी आज ऑपरेशन सिंदूर के तहत 7 प्रतिनिधिमंडलों से मुलाकात करेंगे: वैश्विक मंच पर भारत की कूटनीति को मजबूती

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज शाम 7:30 बजे अपने आधिकारिक आवास, 7 लोक कल्याण मार्ग, नई दिल्ली में ऑपरेशन सिंदूर के तहत विदेश गए सात प्रतिनिधिमंडलों के सदस्यों से मुलाकात करेंगे। इन प्रतिनिधिमंडलों में विभिन्न राजनीतिक दलों के सांसद शामिल थे, जिन्होंने हाल ही में 33 देशों का दौरा कर भारत का पक्ष मजबूती से रखा और पाकिस्तान द्वारा प्रायोजित आतंकवाद को बेनकाब किया।

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ऑपरेशन सिंदूर भारत सरकार की एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक पहल है, जिसका उद्देश्य भारतीय सांसदों के माध्यम से वैश्विक मंच पर भारत की नीतियों, उपलब्धियों और आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई को रेखांकित करना है। इन प्रतिनिधिमंडलों ने विभिन्न देशों में वहां के नेताओं, नीति निर्माताओं और प्रभावशाली हस्तियों से मुलाकात की, ताकि सीमा पार आतंकवाद सहित पाकिस्तान की गतिविधियों को उजागर किया जा सके और भारत के दृष्टिकोण को स्पष्ट किया जा सके।

सातों प्रतिनिधिमंडलों में शामिल प्रमुख सांसदों में निम्नलिखित नाम उल्लेखनीय हैं:  

* शशि थरूर (कांग्रेस) : वरिष्ठ सांसद और विदेश मामलों के विशेषज्ञ

* रविशंकर प्रसाद (बीजेपी) : पूर्व केंद्रीय मंत्री और कानून विशेषज्ञ

* संजय झा (जेडीयू) : बिहार से राज्यसभा सांसद

* कनिमोझी (डीएमके) : तमिलनाडु से सांसद और डीएमके की प्रमुख नेता

* सुप्रिया सुले (एनसीपी) : महाराष्ट्र से सांसद और शरद पवार की बेटी

* बैजयंत पांडा (बीजेपी) : ओडिशा से सांसद और पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष

* श्रीकांत शिंदे (शिवसेना) : महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के बेटे और सांसद

बैठक के बाद, प्रधानमंत्री मोदी सभी सांसदों के लिए एक विशेष डिनर की मेजबानी करेंगे। यह आयोजन न केवल औपचारिक होगा, बल्कि विभिन्न दलों के नेताओं के बीच अनौपचारिक बातचीत का अवसर भी प्रदान करेगा। यह कदम राष्ट्रीय हितों पर एकजुटता और भारतीय राजनीति में द्विदलीय सहयोग को दर्शाता है।

ऑपरेशन सिंदूर भारत की सक्रिय कूटनीति और वैश्विक मंच पर अपनी स्थिति को मजबूत करने की रणनीति का प्रतीक है। 2019 के पुलवामा हमले और बालाकोट हवाई हमले के बाद भारत ने आतंकवाद के खिलाफ अपनी लड़ाई को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और जोर-शोर से उठाया है। इन प्रतिनिधिमंडलों ने उन देशों को भी लक्षित किया, जो पहले पाकिस्तान के प्रति नरम रुख रखते थे, और उन्हें भारत के सबूतों व तर्कों से अवगत कराया।

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