उपराष्ट्रपति चुनाव को लेकर प्रक्रिया शुरू, उम्मीदवारों के नामों पर सस्पेन्स बरकरार
नई दिल्ली: भारत के उपराष्ट्रपति चुनाव 2027 की प्रक्रिया औपचारिक रूप से शुरू हो चुकी है। चुनाव आयोग ने रिटर्निंग ऑफिसर और सहायक रिटर्निंग ऑफिसर की नियुक्ति के साथ ही तैयारियां तेज कर दी हैं। जल्द ही चुनाव के लिए अधिसूचना जारी होने की उम्मीद है। इस बीच, सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) और विपक्षी इंडिया गठबंधन के उम्मीदवारों के चयन को लेकर राजनीतिक गलियारों में अटकलों का बाजार गर्म है।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!उपराष्ट्रपति चुनाव की प्रक्रिया
भारत के संविधान के अनुच्छेद 66 के अनुसार, उपराष्ट्रपति का चुनाव एक निर्वाचक मंडल द्वारा किया जाता है, जिसमें लोकसभा और राज्यसभा के निर्वाचित और मनोनीत दोनों सदस्य शामिल होते हैं। यह प्रक्रिया राष्ट्रपति चुनाव से भिन्न है, क्योंकि इसमें राज्य विधानसभाओं के सदस्य मतदान में भाग नहीं लेते। चुनाव एकल हस्तांतरणीय मत (Single Transferable Vote) प्रणाली के तहत होता है, जिसमें मतदाता अपनी प्राथमिकता के आधार पर उम्मीदवारों को क्रमबद्ध करते हैं। मतदान गुप्त होता है और परिणामों की घोषणा भारत निर्वाचन आयोग द्वारा की जाती है।
एनडीए का दबदबा, विपक्ष की रणनीति
संसद के दोनों सदनों में एनडीए का बहुमत होने के कारण सत्तारूढ़ गठबंधन का उम्मीदवार जीत का प्रबल दावेदार माना जा रहा है। हाल के एक पोस्ट के अनुसार, एनडीए के पास 426 वोट हैं, जो जीत के लिए आवश्यक 395 वोटों से अधिक है। 2022 के उपराष्ट्रपति चुनाव में एनडीए के उम्मीदवार जगदीप धनखड़ ने 528 मतों के साथ ऐतिहासिक जीत हासिल की थी, जो 30 वर्षों में सबसे अधिक थी। इस बार भी एनडीए क्षेत्रीय और सामाजिक समीकरणों को ध्यान में रखकर उम्मीदवार चुनने की रणनीति बना रहा है।
वहीं, इंडिया गठबंधन एक ऐसे उम्मीदवार की तलाश में है जो विपक्षी दलों के बीच एकजुटता स्थापित कर सके और सत्तारूढ़ गठबंधन को कड़ी चुनौती दे सके। 2022 में मार्गरेट अल्वा के चयन में विपक्षी एकता की कमी देखी गई थी, और इस बार गठबंधन इस गलती को दोहराने से बचना चाहेगा।
संवैधानिक महत्व और उम्मीदवारों का चयन
उपराष्ट्रपति का पद न केवल कार्यकारिणी में दूसरा सर्वोच्च पद है, बल्कि यह राज्यसभा का पदेन सभापति भी होता है, जो विधायी प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उम्मीदवारों का चयन जातिगत, क्षेत्रीय और सामाजिक समीकरणों को संतुलित करने के साथ-साथ राजनीतिक रणनीति पर भी निर्भर करेगा। सूत्रों के अनुसार, एनडीए दक्षिण भारत, पश्चिम बंगाल या पूर्वोत्तर राज्यों से उम्मीदवार चुन सकता है ताकि क्षेत्रीय संतुलन बनाया जा सके।
समयसीमा और अगले कदम
संविधान के अनुच्छेद 67(ए) के तहत, उपराष्ट्रपति पद रिक्त होने पर 60 दिनों के भीतर चुनाव कराना आवश्यक है। इस हिसाब से 19 सितंबर 2025 तक नया उपराष्ट्रपति चुना जाना है। चुनाव आयोग जल्द ही अधिसूचना जारी करेगा, जिसके बाद नामांकन प्रक्रिया शुरू होगी। प्रत्येक उम्मीदवार को 20 प्रस्तावकों और 20 अनुमोदकों का समर्थन चाहिए, और नामांकन के लिए 15,000 रुपये की जमानत राशि जमा करानी होगी।
2027 का उपराष्ट्रपति चुनाव न केवल संवैधानिक प्रक्रिया का हिस्सा है, बल्कि यह सत्तारूढ़ और विपक्षी गठबंधनों के लिए अपनी ताकत और एकजुटता दिखाने का अवसर भी है। एनडीए की संख्याबल में मजबूती के बावजूद, विपक्ष एक मजबूत उम्मीदवार के साथ राजनीतिक संदेश देने की कोशिश करेगा। उम्मीदवारों के नामों पर सस्पेन्स बरकरार है, और अगले कुछ हफ्तों में तस्वीर साफ होने की उम्मीद है।

















