रांची जिला प्रशासन का बड़ा फैसला: सभी जलाशयों को एक सप्ताह में अतिक्रमण मुक्त करने का निर्देश
रांची : रांची जिला प्रशासन जल संरक्षण और पर्यावरण संरक्षण के प्रति गंभीर है। इसी क्रम में आज उपायुक्त-सह-जिला दंडाधिकारी मंजूनाथ भजन्त्री की अध्यक्षता में जूम प्लेटफॉर्म पर जिला स्तरीय अधिकारियों के साथ एक महत्वपूर्ण ऑनलाइन बैठक आयोजित की गई। बैठक का मुख्य उद्देश्य जिले के विभिन्न जलाशयों में हो रहे अतिक्रमण को पूरी तरह हटाना और जल स्रोतों के संरक्षण के लिए ठोस कार्य योजना तैयार करना था।
बैठक में अनुमंडल पदाधिकारी सदर रांची उत्कर्ष कुमार, अपर समाहर्ता रामनारायण सिंह, अपर जिला दंडाधिकारी विधि-व्यवस्था राजेश्वर नाथ आलोक तथा सभी संबंधित अंचल अधिकारी ऑनलाइन उपस्थित थे।
उपायुक्त ने कांके डैम, हटिया डैम (धुर्वा डैम), गेतलसूद डैम, हरमू नदी, हिनू नदी तथा अन्य तालाबों और जल स्रोतों की वर्तमान स्थिति की विस्तृत समीक्षा की। संबंधित अधिकारियों से अतिक्रमण की स्थिति, अब तक की कार्रवाइयों और आगे की योजना पर जानकारी ली गई।
उपायुक्त भजन्त्री ने सख्त लहजे में कहा, “जलाशयों के आसपास अवैध अतिक्रमण को किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।” उन्होंने सभी विभागों को संयुक्त अभियान चलाकर अतिक्रमण हटाने के निर्देश दिए। अपर समाहर्ता को अंचल अधिकारियों के लिए रोस्टर तैयार करने और नियमित निरीक्षण सुनिश्चित करने को कहा गया। साथ ही, राजस्व नक्शे के अनुसार जलाशयों की मूल सीमा चिह्नित कर अतिक्रमण मुक्त क्षेत्र को संरक्षित करने पर जोर दिया गया।
उपायुक्त ने स्पष्ट किया कि जल स्रोतों का संरक्षण सर्वोच्च प्राथमिकता है। अतिक्रमण से जल भंडारण क्षमता कम होती है और भूजल स्तर पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। जिला प्रशासन दृढ़ संकल्पित है कि रांची जिले के सभी जलाशयों को एक सप्ताह में अतिक्रमण मुक्त कर दिया जाएगा तथा इनका सौंदर्यीकरण और संरक्षण सुनिश्चित किया जाएगा।
जिला प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि वे जलाशयों के आसपास किसी प्रकार का अतिक्रमण न करें और प्रशासन को पूर्ण सहयोग प्रदान करें। यह अभियान जल संरक्षण के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
यह प्रयास झारखंड हाईकोर्ट के हालिया निर्देशों के अनुपालन में भी है, जिसमें राज्य की राजधानी में जलाशयों को अतिक्रमण मुक्त करने का आदेश दिया गया था। जिला प्रशासन की इस पहल से रांची के जल स्रोतों की सुरक्षा और शहर की हरियाली को मजबूती मिलेगी।


















