रांची: नवजात की मृत्यु मामले में लिटिल हार्ट अस्पताल पर गंभीर आरोप, DC ने दिए जांच के आदेश ,जिला प्रशासन ने शुरू की जांच
रांची: नवजात की मृत्यु मामले में लिटिल हार्ट अस्पताल पर गंभीर आरोप, DC ने दिए जांच के आदेश ,जिला प्रशासन ने शुरू की जांच
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!रांची : अरगोड़ा स्थित लिटिल हार्ट न्यूबॉर्न एंड चाइल्ड हार्ट सेंटर में एक नवजात की मृत्यु के बाद अस्पताल प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगे हैं। परिजनों का दावा है कि नवजात की मृत्यु के बावजूद उसे चार-पांच दिनों तक वेंटिलेटर पर रखा गया और इलाज के नाम पर लाखों रुपये वसूले गए। इस मामले को जिला प्रशासन और पुलिस ने गंभीरता से लिया है, और जांच शुरू कर दी गई है।
उपायुक्त मंजूनाथ भजंत्री के आदेश पर जांच समिति गठित
रांची के उपायुक्त-सह-जिला दंडाधिकारी मंजूनाथ भजंत्री ने मामले की विस्तृत जांच के आदेश दिए हैं। उनके निर्देश पर एक जांच समिति का गठन किया गया है, जिसमें कार्यपालक दंडाधिकारी, जिला समाज कल्याण पदाधिकारी, और विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम शामिल है। उपायुक्त ने स्पष्ट किया है कि यदि जांच में अस्पताल प्रबंधन या किसी व्यक्ति की लापरवाही या दोष सिद्ध होता है, तो उनके खिलाफ नियमसंगत कठोर कार्रवाई की जाएगी।
पोस्टमार्टम में चौंकाने वाला खुलासा
पुलिस ने नवजात के शव को कब्जे में लेकर गुरुवार को रिम्स में पोस्टमार्टम कराया। पोस्टमार्टम करने वाले चिकित्सकों ने बताया कि बच्चे की मृत्यु कई दिन पहले हो चुकी थी, और शव सड़ने की स्थिति में था, जिससे बदबू आ रही थी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट पुलिस को सौंपी जाएगी, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई होगी। पुलिस ने बताया कि रिपोर्ट आने में 10-15 दिन का समय लग सकता है। पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया।

परिजनों का आरोप: मृत बच्चे को वेंटिलेटर पर रखकर वसूले पैसे
नवजात के पिता मुकेश सिंह, हरमू के गंगानगर निवासी, ने अरगोड़ा थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई है। उन्होंने बताया कि उनका बेटा 4 जुलाई को रांची सदर अस्पताल में पैदा हुआ था। 8 जुलाई को इंफेक्शन के कारण उसे लिटिल हार्ट सेंटर रेफर किया गया। अस्पताल में 15 दिनों तक बच्चे से मिलने नहीं दिया गया और न ही उसकी स्थिति की स्पष्ट जानकारी दी गई। हर दिन दवाओं और खून की मांग की जाती रही।
31 जुलाई को जब परिजनों ने बच्चे को देखने की जिद की, तब उन्हें मृत बच्चा सौंपा गया। परिजनों का आरोप है कि बच्चे की मृत्यु चार-पांच दिन पहले हो चुकी थी, लेकिन अस्पताल ने इलाज के नाम पर पैसे वसूलना जारी रखा। उन्होंने यह भी दावा किया कि अस्पताल के मालिक ने उन्हें धमकाया। मुकेश सिंह ने डॉ. आशुतोष और डॉ. सत्यजीत के खिलाफ शिकायत दर्ज की है, जिसमें मृत्यु को छिपाकर इलाज जारी रखने और पैसे वसूलने का आरोप लगाया गया है।
पहले भी उठे हैं सवाल
परिजनों ने यह भी आरोप लगाया है कि यह कोई पहला मामला नहीं है। उनके अनुसार, अस्पताल में कई नवजातों के साथ ऐसी लापरवाही हो रही है, जहां मृत बच्चों को बदबू आने तक वेंटिलेटर पर रखा जाता है। इस बार मामला सामने आने के बाद अस्पताल प्रबंधन पर सवाल उठ रहे हैं।
पुलिस का आश्वासन: दोषियों पर होगी कार्रवाई
पुलिस ने परिजनों को आश्वासन दिया है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। मामले की जांच का जिम्मा पुलिस अधिकारी गौतम कुमार राय को सौंपा गया है। परिजनों ने सभी दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
आगे की कार्रवाई पर नजर
जाहिर है इस मामले ने निजी अस्पतालों में चिकित्सा सेवाओं की गुणवत्ता और पारदर्शिता पर सवाल खड़े किए हैं। जिला प्रशासन और पुलिस की जांच के नतीजों पर सभी की नजरें टिकी हैं। यह घटना न केवल रांची, बल्कि पूरे राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं की जवाबदेही को लेकर चर्चा का विषय बन गई है।

















