166 करोड़ की रोड सेफ्टी योजनाओं पर सवाल, परिवहन आयुक्त से फिर मांगा गया जवाब
रांची। झारखंड में सड़क सुरक्षा को मजबूत करने के लिए मंजूर की गई करोड़ों रुपये की योजनाओं की धीमी रफ्तार अब विभागीय जवाबदेही का मुद्दा बन गई है। करीब 166 करोड़ रुपये की परियोजनाओं में अपेक्षित प्रगति नहीं होने को लेकर परिवहन आयुक्त संजीव बेसरा से दोबारा जवाब मांगा गया है। विभाग ने उन्हें तीन दिनों के भीतर संबंधित दस्तावेजों के साथ स्थिति स्पष्ट करने को कहा है।
मामला इसलिए भी अहम है क्योंकि ये परियोजनाएं सड़क हादसों को कम करने और दुर्घटना संभावित स्थानों पर सुरक्षा व्यवस्था बेहतर करने के उद्देश्य से मंजूर की गई थीं। संजीव बेसरा रोड सेफ्टी फंड मैनेजिंग कमेटी के सदस्य सचिव की जिम्मेदारी भी संभाल रहे हैं।
पहले जवाब मांगा गया, लेकिन नहीं मिला
विभागीय जानकारी के मुताबिक, योजनाओं की प्रगति को लेकर परिवहन विभाग ने इससे पहले भी संजीव बेसरा से स्पष्टीकरण मांगा था। उन्हें तय समय के भीतर जवाब देना था, लेकिन जवाब नहीं मिलने के बाद विभाग ने अब फिर से पत्र जारी किया है।
दूसरी बार मांगे गए जवाब में केवल योजनाओं की मौजूदा स्थिति ही नहीं, बल्कि उन्हें लागू करने के लिए अब तक उठाए गए कदमों का भी हिसाब मांगा गया है।
विभाग यह जानना चाहता है कि स्वीकृत परियोजनाएं किन चरणों में हैं, उनके लंबित रहने की वजह क्या है और संबंधित विभागों अथवा एजेंसियों के साथ इस संबंध में क्या कार्रवाई की गई।

अब समयसीमा और कार्ययोजना भी बतानी होगी
स्पष्टीकरण में परिवहन आयुक्त से प्रत्येक योजना को पूरा करने की प्रस्तावित समयसीमा और आगे की कार्ययोजना बताने को कहा गया है। इसके अलावा पहले जारी किए गए स्पष्टीकरण का जवाब क्यों नहीं दिया गया, इसका कारण भी पूछा गया है।
अक्टूबर 2025 में मिली थी मंजूरी
रोड सेफ्टी फंड मैनेजिंग कमेटी की 10 अक्टूबर 2025 को मुख्य सचिव की अध्यक्षता में हुई बैठक में वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए सड़क सुरक्षा से जुड़ी परियोजनाओं को मंजूरी दी गई थी।
इनमें ब्लैक स्पॉट पर निगरानी कैमरे लगाने से लेकर वाहन वजन प्रणाली, सड़क सुरक्षा संकेतक, ऑटोमेटेड टेस्टिंग ट्रैक और सुरक्षा उपकरणों की खरीद जैसी योजनाएं शामिल हैं।
योजनाओं में अकेले SVD/ANPR/CCTV कैमरों के लिए ₹55 करोड़, सड़क सुरक्षा उपकरणों के लिए ₹54.20 करोड़, Automated Testing Tracks के लिए ₹20 करोड़ और ब्लैक स्पॉट पर सुरक्षा संकेतकों के लिए ₹15 करोड़ का प्रावधान बताया गया है।
मार्च में भी हुई थी समीक्षा
इन परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा 13 मार्च 2026 को परिवहन सचिव की अध्यक्षता में हुई बैठक में की गई थी। बैठक में प्रशासनिक और वित्तीय प्रक्रिया पूरी करने के साथ योजनाओं को निर्धारित समय में धरातल पर उतारने के निर्देश दिए गए थे।
इसके बावजूद परियोजनाओं की स्थिति को लेकर विभाग को फिर स्पष्टीकरण मांगना पड़ा है। अब तीन दिनों में मिलने वाले जवाब से यह स्पष्ट होगा कि करीब 166 करोड़ रुपये की स्वीकृत योजनाएं किस स्थिति में हैं और उनके क्रियान्वयन में देरी की वास्तविक वजह क्या है।


















