साहेबगंज : नगर भिट्ठा गांव में मलेरिया से पांच पहाड़िया बच्चो की मौत , गांव में दहशत , स्वास्थ विभाग अलर्ट पर
साहेबगंज : नगर भिट्ठा गांव में मलेरिया से पांच पहाड़िया बच्चो की मौत , गांव में दहशत , स्वास्थ विभाग अलर्ट पर
साहिबगंज जिले के मंडरो प्रखंड के अंतर्गत बसहा पंचायत में स्थित नगर भिट्ठा गांव मैं मलेरिया के प्रकोप से पांच बच्चे की मौत हो गई है । भिट्ठा गांव पहाड़ी क्षेत्र में बसा एक छोटा सा गांव है, इस दुखद और चिंताजनक घटना ने पूरे राज्य को हिला दिया है। गांव में पिछले एक सप्ताह में पांच पहाड़िया बच्चों की असामयिक मृत्यु हो गई है, जिसने न केवल स्थानीय समुदाय को बल्कि प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग भी परेशान है। यह गांव लगभग 30 परिवारों का घर है, जिसमें कुल 150 लोग रहते हैं, और इनमें से अधिकांश पहाड़िया जनजाति से हैं। बच्चों की मौत के बाद गांव में डर और अनिश्चितता का माहौल बन गया है।
मृतक बच्चो का नाम
- इतवारी पहाड़िया: 2 साल का, बिरजू पहाड़िया का पुत्र।
- विकास पहाड़िया: 6 साल का, आसना पहाड़िया का पुत्र।
- सजनी पहाड़िन: 2 साल की, सोमरा पहाड़िया की पुत्री।
- बेपर पहाड़िया: 6 साल का, गुल्ली पहाड़िया का पुत्र।
- जीता पहाड़िन: 2 साल की, चंदु पहाड़िया की पुत्री।
क्या कहते हैं गांव के प्रधान
ग्राम प्रधान मैसा पहाड़िया के अनुसार, यह सिलसिला एक सप्ताह पहले शुरू हुआ जब दो बच्चों की मौत हुई। इसके बाद शनिवार को दो और बच्चों ने दम तोड़ दिया, और फिर रविवार को एक और बच्चे की मृत्यु हो गई। इन मौतों ने गांव वालों को गहरे सदमे में डाल दिया, और उन्होंने तुरंत इसकी सूचना स्थानीय प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग को दी।
स्वास्थ्य विभाग की त्वरित प्रतिक्रिया
जैसे ही यह खबर स्वास्थ्य विभाग तक पहुंची, साहिबगंज के सिविल सर्जन डॉ. प्रवीण कुमार संथालिया ने बिना देरी किए एक मेडिकल टीम के साथ नगर भिट्ठा गांव का दौरा किया। टीम ने गांव पहुंचकर तत्काल स्वास्थ्य जांच शुरू की। प्रारंभिक जांच में 30 लोगों के ब्लड सैंपल लिए गए, जिसमें मलेरिया की जांच के लिए विशेष ध्यान दिया गया। जांच के परिणाम चौंकाने वाले थे—18 लोगों की रिपोर्ट मलेरिया पॉजिटिव आई। इनमें से अधिकांश बच्चे और वयस्क शामिल थे,
क्या कहते हैं सिविल सर्जन
सिविल सर्जन ने बताया कि मलेरिया की पुष्टि होने के बाद सभी प्रभावित मरीजों का इलाज शुरू कर दिया गया है। इसके साथ ही, गांव में एक स्वास्थ्य कैंप स्थापित किया गया है ताकि अन्य लोगों की भी जांच की जा सके और बीमारी को फैलने से रोका जा सके। डॉ. संथालिया ने यह भी संकेत दिया कि बच्चों की मौत का कारण संभवतः मलेरिया ही हो सकता है,
गांव की स्थिति और ग्रामीणों की चिंताएं
नगर भिट्ठा गांव एक दूरदराज का पहाड़ी क्षेत्र है, जहां स्वास्थ्य सुविधाओं और बुनियादी ढांचे की कमी लंबे समय से एक समस्या रही है। ग्राम प्रधान मैसा पहाड़िया ने बताया कि मृत बच्चों के अलावा भी कई ग्रामीण बीमार हैं और उन्हें तत्काल चिकित्सा सहायता की जरूरत है। मलेरिया के लक्षण जैसे तेज बुखार, ठंड लगना, और कमजोरी गांव में कई लोगों में देखे गए हैं। ग्रामीणों का मानना है कि समय पर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध होतीं तो शायद इन बच्चों की जान बचाई जा सकती थी।
गांव के लोग डरे हुए हैं क्योंकि मलेरिया एक संक्रामक बीमारी है, जो मच्छरों के माध्यम से फैलती है। पहाड़ी इलाकों में पानी के ठहराव और नमी के कारण मच्छरों का प्रजनन बढ़ जाता है, जिससे मलेरिया का खतरा और भी गंभीर हो जाता है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि गांव में नियमित स्वास्थ्य जांच और मच्छरों के नियंत्रण के लिए कीटनाशक छिड़काव जैसे कदम उठाए जाएं।
मलेरिया का प्रकोप और संभावित कारण
मलेरिया एक ऐसी बीमारी है जो प्लास्मोडियम परजीवी के कारण होती है और यह एनोफिलीज मच्छरों के काटने से फैलती है। नगर भिट्ठा जैसे ग्रामीण और पहाड़ी क्षेत्रों में इस बीमारी का खतरा अधिक होता है क्योंकि यहां स्वच्छता, मच्छरदानी की उपलब्धता, और स्वास्थ्य जागरूकता का स्तर आमतौर पर कम होता है। मार्च का महीना, जब बारिश और गर्मी का मिश्रण होता है, मच्छरों के प्रजनन के लिए अनुकूल स्थिति पैदा करता है। संभव है कि गांव में हाल के दिनों में ऐसी परिस्थितियां बनी हों, जिसने मलेरिया को फैलने का मौका दिया।
आगे की राह
स्वास्थ्य विभाग ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए तत्काल कदम उठाए हैं, लेकिन यह घटना कई बड़े सवाल खड़े करती है। पहाड़ी और जनजातीय क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच कैसे बढ़ाई जाए? मलेरिया जैसी रोकथाम योग्य बीमारियों से निपटने के लिए जागरूकता और संसाधनों की क्या भूमिका हो सकती है? सिविल सर्जन ने आश्वासन दिया है कि विभाग गांव में स्थिति पर नजर रखेगा और जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त संसाधन उपलब्ध कराए जाएंगे।