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साहिबगंज मल्टीमॉडल टर्मिनल: निर्माण के बावजूद व्यापार में नहीं आई तेजी, रोजगार सृजन अब भी अधूरा

प्रीतम पाण्डेय

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साहिबगंज : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा गंगा नदी तट पर समदा में निर्मित साहिबगंज मल्टीमॉडल टर्मिनल का उद्देश्य जिले में रोजगार सृजन और व्यापारिक विकास को बढ़ावा देना था, लेकिन संचालन शुरू होने के वर्षों बाद भी अपेक्षित लाभ नहीं मिल पाया है। टर्मिनल का संचालन तो शुरू हो गया है, मगर सुस्त गति के कारण स्थानीय लोगों को रोजगार और व्यापारिक अवसरों का इंतजार बना हुआ है। अब स्थानीय स्तर पर इसे गति देने की मांग तेज हो रही है, जबकि जलमार्ग प्राधिकरण समाधान की तलाश में जुटी है।

टर्मिनल के प्रोजेक्ट डायरेक्टर अनुपम सिन्हा के अनुसार, वर्तमान में महीने में मात्र एक-दो कार्गो जहाज आते हैं, जबकि टर्मिनल की क्षमता प्रतिदिन 2-3 कार्गो जहाजों की हैंडलिंग की है। इसे बढ़ाने के लिए कोलकाता जोन के अधिकारी जल्द ही साहिबगंज में चैंबर ऑफ कॉमर्स के साथ बैठक करने वाले हैं।

साहिबगंज के प्रमुख उद्योग स्टोन चिप्स एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष सीपी सिन्हा का कहना है कि बंदरगाह से व्यापार काफी किफायती साबित होगा। इससे क्षेत्र दुनिया से सीधे जुड़कर निर्यात कर सकेगा। उन्होंने कहा, “सरकार सुविधाएं प्रदान करे, हम व्यापार करने को पूरी तरह तैयार हैं।”

इधर, राजनीतिक स्तर पर आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी चल रहा है। राजमहल से भाजपा के पूर्व विधायक अनंत ओझा ने इसे प्रधानमंत्री की देन बताते हुए कहा कि मल्टीमॉडल टर्मिनल का निर्माण केंद्र की पहल से हुआ, लेकिन दूसरे चरण का लॉजिस्टिक पार्क का काम अभी पूरा नहीं हुआ है। यह वर्तमान झारखंड सरकार (जेएमएम) की उदासीनता को दर्शाता है, जिसके कारण टर्मिनल रोजगार सृजन में सफल नहीं हो पाया।

बहरहाल, अप्रैल 2017 में शिलान्यास के बाद से साहिबगंज के लोग रोजगार और विकास के सपने संजोए बैठे हैं, जो अब तक अधूरे ही लग रहे हैं। स्थानीय लोग उम्मीद कर रहे हैं कि आगामी बैठकें और प्रयासों से टर्मिनल को पूर्ण क्षमता पर लाया जा सकेगा, जिससे क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी।

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