सिमडेगा: जर्जर स्कूल भवन में पढ़ रहे सैकड़ों बच्चे, जिला परिषद अध्यक्ष-उपाध्यक्ष ने जताई गंभीर चिंता
शंभू कुमार सिंह
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!सिमडेगा/कुरडेग : कुरडेग प्रखंड के हेटमा स्थित चापाबरी राजकीयकृत मध्य विद्यालय की जर्जर हालत ने बच्चों की सुरक्षा को गंभीर खतरे में डाल दिया है। छत से प्लास्टर लगातार गिर रहा है, सरिया बाहर निकल आई है और बड़ा हिस्सा उखड़ चुका है। ऐसे खतरनाक माहौल में सैकड़ों बच्चे रोज पढ़ाई करने को मजबूर हैं।
विद्यालय की प्रिंसिपल सुचिता टोप्पो और सहायक शिक्षक दीपमति कुमारी ने बताया कि वर्तमान स्थिति में कक्षाएं चलाना बच्चों की जान जोखिम में डालने जैसा है। शिक्षक और छात्र दोनों डर के साये में हैं। किसी भी समय बड़ा हादसा हो सकता है।
स्कूल की इस बदहाल स्थिति की सूचना मिलने पर जिला परिषद अध्यक्ष और उपाध्यक्ष स्वयं विद्यालय पहुंचीं और निरीक्षण किया। टूटती छत, गिरता प्लास्टर और नंगी सरिया देखकर दोनों भावुक हो गईं। उन्होंने इसे शिक्षा के मंदिर की शर्मनाक हालत करार दिया।
जिला परिषद अध्यक्ष का बयान
जिला परिषद अध्यक्ष ने कहा, “यह स्थिति बेहद गंभीर है। छत से प्लास्टर गिर रहा है और सरिया खुली हुई है। बच्चों को ऐसे में पढ़ाना उनकी जान से खिलवाड़ है। बच्चों की सुरक्षा सर्वोपरि है और किसी भी लापरवाही को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।” उन्होंने प्रशासन से तत्काल मरम्मत और नए भवन निर्माण की प्रक्रिया शुरू करने की मांग की।
उपाध्यक्ष ने सिस्टम पर साधा निशाना
जिला परिषद उपाध्यक्ष ने कहा, “जब बच्चे डर के साये में पढ़ने को मजबूर हों, तो यह पूरे सिस्टम पर सवाल उठाता है। स्कूल की हालत देखकर मन दुखी हो गया।” उन्होंने प्रशासन से तुरंत ठोस कदम उठाने की अपील की।
छात्र संख्या घट रही, अभिभावक चिंतित
विद्यालय में सैकड़ों छात्र नामांकित हैं, लेकिन जर्जर भवन के डर से कई अभिभावक बच्चों को अन्य स्कूलों में शिफ्ट कर रहे हैं। इससे छात्र संख्या लगातार कम हो रही है, जो सरकारी शिक्षा व्यवस्था के लिए बड़ा झटका है।
प्रिंसिपल सुचिता टोप्पो ने खुलासा किया कि उन्होंने कई बार शिक्षा विभाग को लिखित और मौखिक शिकायत की है, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।
अब सवाल यह है कि क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है? या समय रहते बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाएगी? क्षेत्रवासियों की निगाहें प्रशासन पर टिकी हैं।

















