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सिमडेगा में जलमीनार बना सफेद हाथी: ग्रामीण बूंद-बूंद पानी को तरस रहे

शंभू कुमार सिंह 

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सिमडेगा : झारखंड के सिमडेगा जिले के ठेठईटांगर प्रखंड अंतर्गत केरया पंचायत के चीरोबेड़ा एवं देऊबहार गांवों में लाखों रुपये की लागत से बने जलमीनार और डीप बोरिंग आज भी ग्रामीणों के लिए वरदान नहीं बन पाए हैं। बल्कि ये संरचनाएं दिखावे की बनी हुई हैं, जबकि ग्रामीण कुओं और डाड़ी के पानी पर निर्भर हैं, जो गर्मियों में सूख जाते हैं।

ग्रामीणों की शिकायत है कि जिला परिषद द्वारा कराए गए इन कार्यों में ठेकेदार (संवेदक) की लापरवाही और गैर-जिम्मेदाराना रवैया जिम्मेदार है। बोरिंग के दौरान पानी न निकलने पर संवेदक ने तकनीकी नियमों की अनदेखी करते हुए कुएं का पानी बोरिंग में भर दिया और दावा किया कि इससे जलस्तर बढ़ेगा। शुरुआत में कुछ समय के लिए जलमीनार में पानी चढ़ा, लेकिन उसके बाद कभी पानी नहीं आया। नतीजा यह कि आज तक किसी भी घर में एक बूंद भी पानी नहीं पहुंचा।

इस गंभीर समस्या को लेकर ग्रामीणों ने ठेठईटांगर के जिला परिषद सदस्य कृष्णा बड़ाईक से शिकायत की। शिकायत मिलते ही जिला परिषद अध्यक्ष रोस प्रतिमा सोरेंग और उपाध्यक्ष सोनी पैंकरा ने सदस्य के साथ मौके पर पहुंचकर डीप बोरिंग और जलमीनार का स्थलीय निरीक्षण किया।

ग्रामीणों ने निरीक्षण के दौरान पूरी स्थिति बताई और अपनी पीड़ा व्यक्त की। दोनों अधिकारियों ने समस्या को गंभीरता से लिया और ग्रामीणों को भरोसा दिलाया कि जल्द ही तकनीकी रूप से सही तरीके से नया बोरिंग कराया जाएगा। साथ ही पहले किए गए कार्यों की गहन जांच कर सरकारी धन के दुरुपयोग की जिम्मेदारी तय की जाएगी। जनहित से खिलवाड़ करने वाले दोषी संवेदक के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

जिला परिषद ने स्पष्ट किया कि यह मामला केवल पेयजल संकट का नहीं, बल्कि सरकारी योजनाओं की गुणवत्ता, पारदर्शिता और जवाबदेही से जुड़ा है। ग्रामीणों को उनका हक – स्वच्छ और नियमित पेयजल – जल्द उपलब्ध कराने का वादा किया गया है।

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