Supreme Court gets five new judges, President Murmu approves the appointments

टीएमसी के 20 सांसदों पर दल-बदल की तलवार, सुप्रीम कोर्ट ने मांगा जवाब; स्पीकर की कार्रवाई पर भी नजर

नई दिल्ली: तृणमूल कांग्रेस के 20 सांसदों से जुड़ा दल-बदल का विवाद अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है। पार्टी सांसद अभिषेक बनर्जी की ओर से दाखिल याचिका पर शीर्ष अदालत ने संबंधित पक्षों से जवाब मांगा है। मामले में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को भी पक्षकार बनाया गया है।

सुनवाई के दौरान लोकसभा अध्यक्ष की तरफ से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता अदालत में पेश हुए। उन्होंने बताया कि स्पीकर के स्तर पर इस मामले में प्रक्रिया पहले ही शुरू की जा चुकी है। उनके मुताबिक, संबंधित सांसदों को अपना पक्ष रखने के लिए जवाब मांगा गया है।

तुषार मेहता ने अदालत से आग्रह किया कि लोकसभा अध्यक्ष को अलग से औपचारिक नोटिस जारी नहीं किया जाए। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर वह स्पीकर की ओर से अदालत की सहायता करेंगे। सुप्रीम कोर्ट ने इस व्यवस्था को स्वीकार कर लिया।

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20 सांसदों की सदस्यता पर उठे सवाल

अभिषेक बनर्जी की याचिका का मुख्य आधार संविधान की 10वीं अनुसूची यानी दल-बदल विरोधी कानून है। याचिका में दावा किया गया है कि टीएमसी के इन 20 सांसदों के खिलाफ इसी प्रावधान के तहत कार्रवाई होनी चाहिए और उनकी लोकसभा सदस्यता समाप्त की जानी चाहिए।

याचिका में यह भी सवाल उठाया गया है कि इन सांसदों को किसी अलग संसदीय गुट के रूप में औपचारिक मान्यता मिली है या नहीं। टीएमसी की ओर से कहा गया है कि यदि उन्हें किसी दूसरे गुट के सांसद के तौर पर मान्यता देने का दावा है, तो इस पर भी स्पष्ट और शीघ्र निर्णय होना चाहिए।

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जून में स्पीकर के सामने उठाया था मामला

अभिषेक बनर्जी के मुताबिक, टीएमसी ने जून में ही इन 20 सांसदों के खिलाफ दल-बदल कानून के तहत कार्रवाई की मांग करते हुए लोकसभा अध्यक्ष के समक्ष याचिकाएं दाखिल की थीं। उनका आरोप है कि लंबे समय तक कोई संतोषजनक फैसला नहीं आने के बाद उन्हें सुप्रीम कोर्ट का रुख करना पड़ा।

अभिषेक बनर्जी ने यह भी बताया कि उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से व्यक्तिगत रूप से मुलाकात कर इन सांसदों के खिलाफ कार्रवाई की मांग रखी थी।

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अब स्पीकर की प्रक्रिया पर टिकी नजर

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान यह सामने आया कि लोकसभा अध्यक्ष की ओर से संबंधित सांसदों से जवाब मांगा जा चुका है। ऐसे में अब पूरे मामले में सांसदों के जवाब और स्पीकर के स्तर पर होने वाली आगे की कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी।

दल-बदल कानून के तहत सांसदों की सदस्यता को लेकर अंतिम निर्णय स्पीकर के स्तर पर लिया जाना है, जबकि अब इस विवाद की न्यायिक निगरानी भी शुरू हो गई है। ऐसे में आने वाले दिनों में टीएमसी के इन 20 सांसदों की स्थिति पर राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तरों पर नजर रहेगी।

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Drishti Now

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वरिष्ठ संवाददाता

झारखंड की राजनीति, प्रशासन और स्थानीय खबरों पर लंबे समय से रिपोर्टिंग कर रहे हैं।