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पत्रकार अभिषेक उपाध्याय को सुप्रीम कोर्ट से राहत, FIR रद्द कराने के लिए हाईकोर्ट जाने की स्वतंत्रता; गिरफ्तारी पर रोक बरकरार

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नई दिल्ली। पत्रकार अभिषेक उपाध्याय के खिलाफ गाजियाबाद के इंदिरापुरम थाने में दर्ज प्राथमिकी को निरस्त कराने की मांग पर सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल कोई अंतिम फैसला नहीं सुनाया है। हालांकि, शीर्ष अदालत ने उन्हें संबंधित क्षेत्राधिकार वाले हाईकोर्ट में जाने की स्वतंत्रता दी है। इसके साथ ही उनकी गिरफ्तारी पर अगले आदेश तक रोक बरकरार रखी गई है।14 अक्टूबर 2026 को मुख्य न्यायाधीश और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ ने आपराधिक रिट याचिका संख्या 339/2026 पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया। याचिका में अभिषेक उपाध्याय ने संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत प्राथमिकी निरस्त करने और गिरफ्तारी से संरक्षण देने की मांग की थी।

सुप्रीम कोर्ट ने FIR रद्द करने से किया परहेज

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि उसने गाजियाबाद के इंदिरापुरम थाने में दर्ज प्राथमिकी संख्या 678/2026 को निरस्त नहीं किया है। साथ ही प्राथमिकी में लगाए गए आरोपों की सत्यता या उनके गुण-दोष पर कोई टिप्पणी नहीं की है।अदालत ने कहा कि प्राथमिकी की प्रति अब याचिकाकर्ता को उपलब्ध करा दी गई है। ऐसे में वह संबंधित क्षेत्राधिकार वाले हाईकोर्ट में कानून के अनुसार उचित राहत मांग सकते हैं। इस आदेश के बाद प्राथमिकी की वैधता को चुनौती देने के लिए हाईकोर्ट में अलग से कानूनी कार्यवाही का रास्ता खुल गया है।

पत्रकार अभिषेक उपाध्याय को सुप्रीम कोर्ट से राहत, FIR रद्द कराने के लिए हाईकोर्ट जाने की स्वतंत्रता; गिरफ्तारी पर रोक बरकरार

क्या है पूरा मामला?

प्राथमिकी में 18 अगस्त 2026 को गाजियाबाद के शिप्रा मॉल के पास हुई कथित सड़क दुर्घटना का उल्लेख है।
शिकायतकर्ता के आरोप के मुताबिक, स्कूल से अपनी नाबालिग पुत्री को लेकर लौट रहे अभिषेक उपाध्याय की कार ने उनकी मोटरसाइकिल को पीछे से टक्कर मार दी थी। इसके बाद अभिषेक उपाध्याय पर गाली-गलौज करने, धमकी देने और नाम तथा जाति पूछकर टिप्पणी करने के आरोप लगाए गए।अभिषेक उपाध्याय ने इन आरोपों से इनकार किया है। उनका दावा है कि उनकी पत्रकारिता के कारण उन्हें निशाना बनाया जा रहा है और यह मामला कथित रूप से उनकी पत्रकारिता से जुड़ा हुआ है।

गिरफ्तारी पर रोक बरकरार, जांच में सहयोग करेंगे

सुप्रीम कोर्ट ने अपने पूर्व आदेशों को पूर्ण प्रभाव देते हुए अभिषेक उपाध्याय की गिरफ्तारी पर अगले आदेश तक रोक जारी रखी है।अदालत ने यह भी उल्लेख किया कि याचिकाकर्ता चल रही जांच में सहयोग करेंगे। इससे पहले 25 अगस्त 2026 को अदालत ने प्राथमिकी की प्रति उपलब्ध कराने और संबंधित मामले में उनके विरुद्ध कोई बलपूर्वक कार्रवाई नहीं करने का निर्देश दिया था। इसके बाद 7 सितंबर 2026 को भी अंतरिम संरक्षण से संबंधित आदेश पारित किया गया था।

X खाते की डिजिटल जानकारी मांगने पर अदालत की टिप्पणी

सुनवाई के दौरान अभिषेक उपाध्याय के X (पूर्व में ट्विटर) खाते से संबंधित डिजिटल जानकारी मांगे जाने का मामला भी सामने आया।22 अगस्त 2026 को गाजियाबाद की क्राइम ब्रांच इन्वेस्टिगेशन यूनिट ने X के नोडल अधिकारी से 1 जून से 22 अगस्त 2026 तक की अवधि की जानकारी मांगी थी। इसमें लॉग-इन और लॉग-आउट IP पते, मोबाइल नंबर, वैकल्पिक ई-मेल, लोकेशन, अक्षांश-देशांतर, डिवाइस और IMEI नंबर सहित अन्य डिजिटल विवरण शामिल थे।
पुलिस आयुक्त ने अपने अनुपालन शपथपत्र में कहा कि प्राथमिकी दर्ज होने के बाद अभिषेक उपाध्याय का पता लगाने के प्रयास किए गए थे। उनके नहीं मिलने पर X के नोडल अधिकारी को नोटिस भेजा गया, ताकि उनका पता लगाने और जांच की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में मदद मिल सके।हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने पाया कि मांगी गई डिजिटल जानकारी की अवधि का बड़ा हिस्सा कथित सड़क दुर्घटना की तारीख से पहले का था। अदालत ने पुलिस आयुक्त के स्पष्टीकरण और नोटिस की विषयवस्तु के बीच असंगति की ओर भी ध्यान दिलाया।

व्यक्तिगत डेटा और निजता पर सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणी

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि कथित अपराध की तारीख से पहले की अवधि के लिए याचिकाकर्ता की गोपनीय या व्यक्तिगत जानकारी प्राप्त नहीं की जा सकती।अदालत ने यह भी कहा कि प्राथमिकी दर्ज होने के बाद की जानकारी भी तब तक नहीं मांगी जा सकती, जब तक व्यक्तिगत डेटा की गोपनीयता सुरक्षित रखने और आनुपातिकता के सिद्धांत का पालन सुनिश्चित करने के लिए पर्याप्त उपाय न हों न्यायालय ने यह स्वतंत्रता भी दी कि याचिकाकर्ता व्यक्तिगत डेटा एकत्र करने और जांच के दौरान डिजिटल जानकारी उपलब्ध कराने के संबंध में अनिवार्य दिशा-निर्देश निर्धारित कराने के लिए सक्षम न्यायालय का दरवाजा खटखटा सकते हैं।

जब्त वाहन को दो दिनों के भीतर मुक्त करने का निर्देश

सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि जांच के सिलसिले में अभिषेक उपाध्याय का वाहन जब्त किया गया था।इस पर सुप्रीम कोर्ट ने वाहन को तत्काल मुक्त करने का निर्देश दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि किसी भी स्थिति में वाहन को दो दिनों के भीतर मुक्त किया जाना चाहिए।

अब हाईकोर्ट में होगी प्राथमिकी की वैधता पर सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अब अभिषेक उपाध्याय संबंधित क्षेत्राधिकार वाले हाईकोर्ट में प्राथमिकी को चुनौती देकर उसे निरस्त करने की मांग कर सकते हैं।अदालत ने अंत में स्पष्ट किया कि उसने प्राथमिकी में लगाए गए आरोपों की विषयवस्तु पर कोई राय व्यक्त नहीं की है। इसके साथ ही आपराधिक रिट याचिका और संबंधित अंतरिम आवेदनों का निस्तारण कर दिया गया।इस प्रकार, सुप्रीम कोर्ट से अभिषेक उपाध्याय को गिरफ्तारी से अंतरिम संरक्षण मिला है, लेकिन उनके खिलाफ दर्ज प्राथमिकी अभी कायम है। अब मामले में आगे की कानूनी लड़ाई हाईकोर्ट में हो सकती है।

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नवीन कुमार

नवीन कुमार

Editor In Chief

नवीन कुमार को पिछले 30 वर्षों से भी अधिक समय से प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का अनुभव रहा है...इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में बड़े पद पर कार्यरत रहे हैं...नक्सल, क्राइम, खेल, राजनीति,बिज्ञान एवं तकनीकी, पर्यावरण के साथ ही समसामयिक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय विषयों पर मजबूत पकड़ रही है। खाली समय में उन्हें नई जगहों पर घूमना और फोटोग्राफी करना पसंद है।