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झारखंड हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: JUIDCO को ईगल इंफ्रा इंडिया लिमिटेड का बकाया 60 दिनों में चुकाने का आदेश, 10% ब्याज भी देना होगा

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रांची, 15 जुलाई 2026 झारखंड हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में झारखंड अर्बन इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कंपनी लिमिटेड (JUIDCO) को निर्देश दिया है कि वह एम/एस ईगल इंफ्रा इंडिया लिमिटेड के लंबित भुगतान का निपटारा 60 दिनों के भीतर करे। न्यायमूर्ति आनंद सेन की एकलपीठ ने स्पष्ट कहा कि जब सरकारी एजेंसी स्वयं यह स्वीकार कर चुकी है कि ठेकेदार ने कार्य पूरा कर दिया है और बाद में प्रदर्शन बैंक गारंटी (Performance Bank Guarantee) भी जारी कर दी गई है, तब भुगतान रोकने का कोई वैधानिक आधार नहीं बचता।

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क्या था मामला?

ईगल इंफ्रा इंडिया लिमिटेड को वर्ष 2015 में हरमू नदी पुनर्जीवन (Harmu River Rejuvenation Project) का ठेका मिला था। कंपनी ने परियोजना का निर्माण कार्य पूरा करने के बाद 1 नवंबर 2018 से 31 अक्टूबर 2023 तक पांच वर्षों का ऑपरेशन एवं मेंटेनेंस (O&M) कार्य भी पूरा किया।

कंपनी का आरोप था कि कार्य पूरा होने के बावजूद JUIDCO ने—

अंतिम रनिंग बिल (R.A. Bill No. 29) का भुगतान नहीं किया,
ऑपरेशन एवं मेंटेनेंस का बकाया नहीं दिया,
31 अक्टूबर 2023 के बाद भी साइट का हैंडओवर नहीं लिया, जिससे कंपनी को अतिरिक्त अवधि तक रखरखाव करना पड़ा,
और लंबे समय तक बैंक गारंटी भी वापस नहीं की।

इन मांगों को लेकर कंपनी ने हाईकोर्ट में रिट याचिका दायर की थी।

JUIDCO का पक्ष

JUIDCO की ओर से दलील दी गई कि यह एक व्यावसायिक अनुबंध से जुड़ा विवाद है, इसलिए इसकी सुनवाई रिट याचिका में नहीं बल्कि सिविल कोर्ट या मध्यस्थता (Arbitration) के माध्यम से होनी चाहिए।

कंपनी ने यह भी कहा कि 31 अक्टूबर 2023 के बाद किए गए कार्य का कोई वैध अनुबंध या विस्तार आदेश नहीं था, इसलिए उस अवधि का भुगतान नहीं किया जा सकता।

सुनवाई के दौरान बड़ा घटनाक्रम

सुनवाई के दौरान JUIDCO के अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि याचिका लंबित रहने के दौरान ही कंपनी की बैंक गारंटी 2-3 दिन पहले वापस कर दी गई है।

हाईकोर्ट ने इसे अत्यंत महत्वपूर्ण तथ्य माना और कहा कि यदि JUIDCO स्वयं बैंक गारंटी जारी कर चुका है, तो इसका सीधा अर्थ है कि उसने ठेकेदार के कार्य और अनुबंधीय दायित्वों की संतोषजनक पूर्ति स्वीकार कर ली है। इसके बाद गुणवत्ता या कार्य निष्पादन पर सवाल उठाना उचित नहीं है।

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हाईकोर्ट की महत्वपूर्ण टिप्पणियां

अदालत ने कहा कि—

केवल यह कह देना कि कार्य की गुणवत्ता पर कोई तकनीकी अधिकारी असहमत था, पर्याप्त नहीं है।
यदि ऐसा कोई गंभीर विवाद था तो उसका कोई दस्तावेज रिकॉर्ड पर प्रस्तुत नहीं किया गया।
UIDCO के अपने पत्र दिनांक 29 जनवरी 2024 में यह स्वीकार किया गया है कि परियोजना तथा पांच वर्ष का O&M कार्य पूरा हो चुका है और अंतिम बिल जांच के अधीन है।
बाद में बैंक गारंटी जारी कर देना भी इस बात का प्रमाण है कि कार्य संतोषजनक ढंग से पूरा हुआ।

अदालत ने यह भी कहा कि यदि किसी सरकारी एजेंसी द्वारा स्वीकृत (Admitted) भुगतान बिना कारण रोका जाता है तो ऐसी स्थिति में संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत रिट याचिका सुनवाई योग्य होती है।

मध्यस्थता (Arbitration) की दलील भी खारिज

हाईकोर्ट ने कहा कि मध्यस्थता तभी आवश्यक होती है जब वास्तविक विवाद मौजूद हो।

इस मामले में रिकॉर्ड से स्पष्ट है कि कार्य पूरा होने और भुगतान देय होने के तथ्य स्वयं JUIDCO स्वीकार कर चुका है। इसलिए यह ऐसा मामला नहीं है जिसमें पक्षकारों को मध्यस्थता या सिविल कोर्ट भेजा जाए।

अतिरिक्त 16 महीने का भुगतान भी मिलेगा

अदालत ने माना कि O&M अवधि 31 अक्टूबर 2023 को समाप्त हो गई थी, लेकिन JUIDCO ने परियोजना का हैंडओवर नहीं लिया।

इस कारण कंपनी को मजबूरन परियोजना का रखरखाव जारी रखना पड़ा। चूंकि इस तथ्य का प्रभावी खंडन नहीं किया गया, इसलिए अदालत ने 1 नवंबर 2023 से रिट याचिका दायर होने तक कुल 16 महीने** की अतिरिक्त अवधि का भुगतान भी कंपनी को देने का आदेश दिया।

हाईकोर्ट का अंतिम आदेश

हाईकोर्ट ने JUIDCO को निर्देश दिया कि—

R.A. Bill No. 29 का पूरा भुगतान किया जाए।
ऑपरेशन एवं मेंटेनेंस का समस्त बकाया चुकाया जाए।
1 नवंबर 2023 से याचिका दायर होने तक 16 महीने की अतिरिक्त O&M अवधि का भुगतान किया जाए।
सभी देय राशि पर 10 प्रतिशत वार्षिक ब्याज देय तिथि से वास्तविक भुगतान तक दिया जाए।
संपूर्ण भुगतान 60 दिनों के भीतर किया जाए।

यह निर्णय सरकारी ठेकों से जुड़े मामलों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यदि सरकारी एजेंसी स्वयं कार्य पूर्ण होने और भुगतान देय होने को स्वीकार करती है, तो केवल औपचारिक या अस्पष्ट आपत्तियों के आधार पर वर्षों तक भुगतान रोकना मनमाना कदम माना जाएगा। ऐसे मामलों में हाईकोर्ट अनुच्छेद 226 के तहत हस्तक्षेप कर सकता है और ठेकेदार को उसका वैध बकाया दिला सकता है।

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