तालिबान के प्रवक्ता ने ट्रंप के बयान को "अफगान संप्रभुता का बताया उल्लंघन" "बुरे परिणाम" भुगतने की दी चेतावनी

तालिबान के प्रवक्ता ने ट्रंप के बयान को “अफगान संप्रभुता का बताया उल्लंघन” “बुरे परिणाम” भुगतने की दी चेतावनी

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तालिबान के प्रवक्ता ने ट्रंप के बयान को "अफगान संप्रभुता का बताया उल्लंघन" "बुरे परिणाम" भुगतने की दी चेतावनी

नवीन कुमार

हाल के दिनों में ट्रम्प का यह बयान “अमेरिका की नजर बगराम एयरबेस पर है ..वह उसे वापस लेना चाहता है”…ने एक बार फिर से दक्षिण एशिया को महाशक्तियों की उपस्थिति को लेकर चर्चा का विषय बना दिया है। लगभग 77 वर्ग किलोमीटर के दायरे में बसा यह एयरबेस 2021 तक अमेरिका का मजबूत केंद्र था। 2001 से 2021 तक यह अमेरिकी सेना का मुख्यालय था जहां 40000 सैनिक रहते थे। यही नहीं हाई प्रोफाइल कैदियों को रखने के अलावे अमेरिका यहां से दक्षिण और मध्य एशिया में नजर भी रखता था।काबुल से 40 किलोमीटर पर स्थित इस बेस को तालिबान के सत्ता में आने के बाद अमेरिका ने छोड़ दिया था। लेकिन ट्रम्प के इस बयान के साथ ही विरोध के स्वर भी सुनने को मिल रहे हैं।हालांकि अमेरिका के लिए यह आसान नहीं होगा । लेकिन सवाल यह भी उठ रहे हैं कि क्या यह क्षेत्र एक बार फिर से महाशक्तियों के शक्ति प्रदर्शन और कूटनीति का केंद्र बनेगा?

तालिबान के प्रवक्ता ने ट्रंप के बयान को "अफगान संप्रभुता का बताया उल्लंघन" "बुरे परिणाम" भुगतने की दी चेतावनी

तालिबान ने कड़े शब्दों में इसकी निंदा

तालिबान के प्रवक्ता ने ट्रंप के बयान को “अफगान संप्रभुता का उल्लंघन” बताया और अमेरिका को “बुरे परिणाम” भुगतने की चेतावनी भी दे डाली। अफगानिस्तान के पड़ोसी देश भारत, पाकिस्तान , ईरान और रूस सहित अन्य क्षेत्रीय शक्तियों ने भी इसका विरोध किया है। 8 और 9 अक्टूबर को मॉस्को में अफगानिस्तान के मुद्दे पर हुई बैठक में शामिल देशों ने भी संयुक्त बयान जारी कर इस प्रस्ताव पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है।रूस ने स्पष्ट किया है कि ऐसा कोई कदम क्षेत्रीय स्थिरता को खतरे में डाल सकता है।

तालिबान के प्रवक्ता ने ट्रंप के बयान को "अफगान संप्रभुता का बताया उल्लंघन" "बुरे परिणाम" भुगतने की दी चेतावनी

हाल के दिनों में अमेरिका की पाकिस्तान के साथ गलबहियां किसी से छिपी नहीं है। ऐसे में बगराम एयरबेस को पाने की कोशिस अमेरिका को क्षेत्र में बढ़त और बर्चस्व दिला सकता है। हिंदुकुश पहाड़ियों के बीच स्थित इस बेस से अमेरिका न केवल दक्षिण एशिया बल्कि मध्य एशिया और चीन की शिनजियांग क्षेत्र पर नजर रख सकता है बल्कि चीन और रूस की बढ़ते प्रभाव पर भी अंकुश लगा सकता है।

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कुल मिलाकर देखा जाय तो अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकार इसे अपने देश के लोगों के बीच दिए गये बयान के रूप में देख रहे हैं। जो अपने लोगों को सकुन तो अवश्य दे सकता है लेकिन क्या यह वर्तमान परिस्थिति में ट्रम्प के लिए आसान होगा ? इसकी संभावना काफी कम दिखाई देती है।

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