क्या है रोमियो-जूलियट क्लॉज, सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को क्यों दिया 'रोमियो-जूलियट क्लॉज' लाने का सुझाव

क्या है रोमियो-जूलियट क्लॉज, सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को क्यों दिया ‘रोमियो-जूलियट क्लॉज’ लाने का सुझाव

Author drishtinow | Edited by drishtinow
Updated: Sat, 10 Jan 2026 04:18 PM (IST)

नई दिल्ली : भारत के सुप्रीम कोर्ट ने बच्चों के यौन शोषण से सुरक्षा संबंधी कानून (POCSO Act) के दुरुपयोग पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। कोर्ट ने केंद्र सरकार को सलाह दी है कि वह ‘रोमियो-जूलियट क्लॉज’ को शामिल करने पर विचार करे, ताकि आपसी सहमति से बने किशोर संबंधों को कानून की कठोर सजा से बचाया जा सके। यह सुझाव ऐसे मामलों में आया है जहां कानून का इस्तेमाल बदले की भावना से किया जा रहा है।

जस्टिस संजय करोल और एन कोटिश्वर सिंह की बेंच ने शुक्रवार को एक फैसले में कहा कि POCSO एक्ट का बार-बार दुरुपयोग हो रहा है, खासकर उन मामलों में जहां किशोर आपसी सहमति से रिश्तों में होते हैं। कोर्ट ने कहा, “इस कानून के दुरुपयोग पर बार-बार न्यायिक नोटिस लिया गया है। केंद्र सरकार को इस समस्या को रोकने के लिए कदम उठाने चाहिए, जिसमें रोमियो-जूलियट क्लॉज शामिल करना भी हो सकता है, जो वास्तविक किशोर रिश्तों को कानून की सख्ती से छूट दे।”

क्या है रोमियो-जूलियट क्लॉज?

यह क्लॉज शेक्सपियर के नाटक ‘रोमियो एंड जूलियट’ से प्रेरित है, जो युवा प्रेम को दर्शाता है। कई देशों में यह प्रावधान है, जहां कम उम्र के किशोरों (आमतौर पर 16-18 साल) के बीच सहमति वाले संबंधों को आपराधिक नहीं माना जाता, अगर उम्र का अंतर बहुत कम हो। भारत में POCSO एक्ट के तहत 18 साल से कम उम्र के किसी भी व्यक्ति के साथ यौन संबंध को अपराध माना जाता है, चाहे सहमति हो या नहीं। कोर्ट का मानना है कि इससे कई निर्दोष युवा प्रभावित हो रहे हैं।

फैसले का बैकग्राउंड

यह टिप्पणी इलाहाबाद हाई कोर्ट के एक फैसले के खिलाफ अपील पर सुनवाई के दौरान आई, जहां हाई कोर्ट ने POCSO मामलों में पीड़ित की उम्र तय करने के लिए शुरुआती जांच में मेडिकल टेस्ट (जैसे ऑसिफिकेशन टेस्ट) अनिवार्य करने का निर्देश दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने इस निर्देश को रद्द कर दिया और कहा कि उम्र का निर्धारण ट्रायल के दौरान होना चाहिए, न कि बेल स्टेज पर।

कोर्ट ने नोट किया कि POCSO एक्ट का उद्देश्य बच्चों की सुरक्षा है, लेकिन इसका इस्तेमाल अक्सर परिवारों द्वारा युवा जोड़ों के खिलाफ हथियार के रूप में किया जाता है। कई मामलों में झूठी उम्र बताकर निर्दोषों को फंसाया जाता है। बेंच ने कहा कि ऐसे दुरुपयोग को रोकने के लिए कानून में बदलाव जरूरी है, जिसमें दुरुपयोग करने वालों के खिलाफ कार्रवाई का प्रावधान भी शामिल हो।

क्या होगा प्रभाव?

यह सुझाव POCSO एक्ट में संशोधन की दिशा में एक बड़ा कदम हो सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे वास्तविक शोषण के मामलों पर फोकस बढ़ेगा और निर्दोष युवाओं को राहत मिलेगी। हालांकि, बच्चों की सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए क्लॉज की शर्तें सख्त होनी चाहिए। केंद्र सरकार को इस फैसले की कॉपी भेजी गई है, ताकि वह उचित कदम उठा सके।

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