बायोफ्लॉक मत्स्य पालन बना आत्मनिर्भरता का माध्यम, किसानों की आय में हो रही वृद्धि

शंभू कुमार सिंह
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!सिमडेगा: प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) और धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान के तहत सिमडेगा जिले में बायोफ्लॉक मत्स्य पालन किसानों के लिए आत्मनिर्भरता और बेहतर आय का नया माध्यम बनकर उभर रहा है। आधुनिक तकनीक और सरकारी सहायता के जरिए जिले के कई किसान आर्थिक रूप से सशक्त हो रहे हैं।

ठेठईटांगर प्रखंड के फरसापानी निवासी विजय केरकेट्टा और टापूदेगा निवासी निरोज बा को योजना के अंतर्गत बायोफ्लॉक इकाई स्थापित करने के लिए अनुदान प्रदान किया गया। दोनों लाभार्थियों ने आधुनिक मत्स्य पालन तकनीक को अपनाते हुए स्थानीय बाजारों के अलावा पड़ोसी राज्यों ओडिशा और छत्तीसगढ़ में भी अपनी मछलियों की बिक्री शुरू की है। बायोफ्लॉक पद्धति से मत्स्य पालन कर रहे इन किसानों को प्रतिवर्ष लगभग 3 से 4 लाख रुपये तक की आय हो रही है, जिससे उनके जीवन स्तर में सकारात्मक बदलाव आया है।

जिला मत्स्य विभाग के अनुसार, योजना के तहत अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति एवं महिला लाभार्थियों को 60 प्रतिशत तक अनुदान उपलब्ध कराया जाता है, जबकि धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान के तहत जनजातीय लाभार्थियों को 90 प्रतिशत तक सहायता दी जाती है।

वर्तमान में सिमडेगा जिले के 8,532 मत्स्य किसान इस गतिविधि से जुड़े हुए हैं। वहीं, जिला मत्स्य कार्यालय द्वारा कुल 47 योजनाओं का संचालन किया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि आधुनिक तकनीक, सरकारी सहयोग और बाजार की उपलब्धता के कारण बायोफ्लॉक मत्स्य पालन जिले में लाभकारी आजीविका के रूप में तेजी से अपनी पहचान बना रहा है।
















