High court jharkhand

जोन्हा में मसरिजारा से हेसलाबेड़ा सड़क बनेगी, 15 गांवों के 20,000 लोगों को मिलेगा फायदा; हाईकोर्ट का बड़ा आदेश

रेलवे की NOC मिलते ही हाईकोर्ट ने जोन्हा  मार्ग की 1.887 किमी सड़क छह माह में बनाने का आदेश

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रांची: झारखंड हाईकोर्ट ने जोन्हा जलप्रपात क्षेत्र को जोड़ने वाली लंबे समय से जर्जर सड़क के निर्माण को लेकर राज्य सरकार को कड़ा निर्देश दिया है। अदालत ने स्पष्ट कहा है कि अब रेलवे से अनापत्ति प्रमाणपत्र (NOC) मिल चुका है, इसलिए सड़क निर्माण में किसी भी प्रकार की देरी स्वीकार नहीं की जाएगी। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को छह महीने के भीतर सड़क का चौड़ीकरण और पक्कीकरण पूरा करने का आदेश दिया है।

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मुख्य न्यायाधीश और न्यायमूर्ति राजेश शंकर की खंडपीठ ने स्वतः संज्ञान (सुओ मोटू) जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया। यह मामला डॉ. देवेंद्र महतो द्वारा भेजे गए एक पत्र के आधार पर दर्ज किया गया था, जिसमें जोन्हा फॉल रोड से मसरिजारा-हेसलाबेड़ा मार्ग की बदहाल स्थिति की ओर अदालत का ध्यान आकर्षित किया गया था।

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अदालत को बताया गया कि करीब 1.887 किलोमीटर सड़क रेलवे भूमि से सटी होने के कारण रेलवे की NOC नहीं मिलने से वर्षों से निर्माण कार्य रुका हुआ था। अब दक्षिण पूर्व रेलवे ने 1 जुलाई 2026 को आवश्यक NOC जारी कर दी है। हाईकोर्ट ने इस पत्र को ही वैध NOC मानते हुए राज्य सरकार को तत्काल कार्य शुरू करने का निर्देश दिया।

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अदालत ने कहा कि अब तक राज्य सरकार की ओर से केवल यही कारण बताया जा रहा था कि रेलवे की अनुमति नहीं मिलने के कारण काम शुरू नहीं हो पा रहा है। चूंकि यह बाधा अब समाप्त हो चुकी है, इसलिए निर्माण कार्य में आगे किसी प्रकार की देरी का कोई औचित्य नहीं है।

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हाईकोर्ट ने निर्देश दिया कि वर्तमान 5 मीटर चौड़ी कच्ची सड़क को 8 मीटर चौड़ा किया जाए तथा इसे पूरी तरह पक्की (मेटल) सड़क में बदला जाए। अदालत ने स्पष्ट किया कि यह कार्य हर हाल में छह महीने के भीतर पूरा होना चाहिए और समय बढ़ाने के लिए सामान्य सरकारी कारण स्वीकार नहीं किए जाएंगे।

खंडपीठ ने ग्रामीण कार्य विभाग के सचिव को व्यक्तिगत रूप से इस परियोजना के समय पर पूरा होने के लिए जिम्मेदार ठहराया है। सचिव आवश्यकतानुसार किसी कार्यपालक अभियंता या अन्य अधिकारी को जिम्मेदारी सौंप सकते हैं, लेकिन अंतिम जवाबदेही उनकी ही होगी।

कोर्ट ने यह भी कहा कि यह सड़क लगभग 15 गांवों और 20 हजार से अधिक लोगों के लिए जीवनरेखा है। इसी मार्ग से ग्रामीण बाजार, स्कूल, अस्पताल और रांची शहर तक पहुंचते हैं। इसके अलावा जोन्हा जलप्रपात आने वाले पर्यटकों को भी खराब सड़क के कारण भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है।

आदेश  के समीक्षा के लिए 21 जनवरी 2027 की तिथि निर्धारित की गई है।

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