दाखिल खारिज के मामलों को निर्धारित अवधि में निष्पादन नहीं करने पर पलामू उपायुक्त ने की बड़ी कार्रवाई।

दाखिल खारिज के मामलों को निर्धारित अवधि में निष्पादन नहीं करने पर पलामू उपायुक्त ने की बड़ी कार्रवाई।

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दाखिल खारिज के मामलों को निर्धारित अवधि में निष्पादन नहीं करने पर पलामू उपायुक्त ने की बड़ी कार्रवाई।

नीलांबर-पीतांबरपुर के सीओ, सीआई एवं कर्मचारी पर लगा 65-65 हजार का अर्थदंड।

दाखिल खारिज के 62 मामले नामांतरण करने की निर्धारित अवधि से अधिक समय तक थे लंबित।

संबंधित पदाधिकारी के वेतन से कोषागार द्वारा काटी जाएगी अर्थदंड की राशि।

दाखिल खारिज के मामलों को लंबित रखने को लेकर पलामू उपायुक्त शशि रंजन ने कड़ी नाराजगी जताई है। उन्होंने दाखिल खारिज के मामलों को निर्धारित अवधि में निष्पादन नहीं करने के बजाए लंबित रखने को लेकर नीलांबर-पीतांबरपुर के अंचल अधिकारी सहित तीन के विरुद्ध आज कार्रवाई की है। उन्होंने नीलांबर-पीतांबरपुर के अंचल अधिकारी सुनील कुमार सिंह, कर्मचारी/ राजस्व उप निरीक्षक रितेश रंजन तिवारी एवं प्रभारी सीआई महेंद्र राम के विरुद्ध कार्रवाई करते हुए 65-65 हजार रुपए का अर्थदंड लगाया है। अर्थदंड की राशि संबंधित पदाधिकारी एवं कर्मी के वेतन से कोषागार द्वारा कटौती की जाएगी। इनके विरुद्ध आरोप है कि दाखिल खारिज के लिए प्राप्त आवेदनों का ससमय निष्पादन नहीं किया। जबकि इसके लिए वरीय अधिकारियों का भी निदेश प्राप्त हुआ। दाखिल खारिज के 62 मामले नामांतरण करने की निर्धारित तिथि से अधिक समय तक लंबित रखने गये, जबकि सामान्य तौर पर 30 दिनों के अंदर दाखिल खारिज के मामलों का नामांतरण किया जाना है तथा आपत्ति के मामलों में 90 दिनों के अंदर नामांतरण करने का समय निर्धारित है। तीनों के विरुद्ध झारखंड राज्य सेवा देने की गारंटी अधिनियम 2011 के अंतर्गत कार्रवाई की गई है।
उपायुक्त शशि रंजन ने कहा कि पलामू वासियों को कठिनाई नहीं हो, इसके लिए प्रशासन सक्रिय रूप से कार्य कर रही है। विकास कार्यों की गति को शिथिल करने वालों के विरुद्ध आगे भी कार्रवाई जारी रहेगी।

*अपर समाहर्ता ने दी थी चेतावनी*

दाखिल खारिज के मामलों का ससमय निष्पादन हेतु पलामू के अपर समाहर्ता द्वारा भी चेतावनी दी गई थी। विदित हो कि अपर समाहर्ता द्वारा 21 दिसंबर 2024 को कार्यालय का निरीक्षण के दौरान मामलों का ससमय निष्पादन का निर्देश दिया गया था। इसके बावजूद निष्पादन नहीं होने की स्थिति में अपर समाहर्ता द्वारा 8 फरवरी 2025 को बैठक के क्रम में चेतावनी दी गई थी। इसके बावजूद भी इन 62 मामलों का निष्पादन ससमय नहीं किया गया।

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