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लालू प्रसाद यादव ने पोते का नाम रखा ‘इराज लालू यादव’, जानें नाम के पीछे का सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व

लालू प्रसाद यादव ने पोते का नाम रखा ‘इराज लालू यादव’, जानें नाम के पीछे का सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व
पटना, रांची (28 मई, ): राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के अध्यक्ष और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव ने अपने नवजात पोते का नामकरण कर सुर्खियां बटोरी हैं। उनके छोटे बेटे और बिहार विधानसभा में विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव के बेटे का नाम लालू यादव और उनकी पत्नी राबड़ी देवी ने मिलकर ‘इराज’ रखा है। तेजस्वी और उनकी पत्नी राजश्री ने बच्चे का पूरा नाम ‘इराज लालू यादव’ रखा है। इस नामकरण की घोषणा लालू यादव ने अपने X हैंडल पर एक भावुक पोस्ट के जरिए की, जिसमें उन्होंने नाम के पीछे के सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व को भी उजागर किया।
नामकरण की घोषणा और उसका महत्व
लालू प्रसाद यादव ने अपनी पोस्ट में लिखा, “हमारी पोती कात्यायनी के छोटे भाई का नाम मैंने और राबड़ी देवी ने ‘इराज’ रखा है। तेजस्वी और राजश्री ने इसका पूरा नाम ‘इराज लालू यादव’ रखा है। कात्यायनी का जन्म शुभ नवरात्रि के छठे दिन, कात्यायनी अष्टमी को हुआ था, और इस नन्हे बच्चे का जन्म बजरंग बली हनुमान जी के मंगल दिवस, मंगलवार को हुआ। इसलिए इसका नाम इराज रखा गया। नवजात और उसकी मां स्वस्थ हैं। आप सभी की शुभकामनाओं और आशीर्वाद के लिए धन्यवाद!”
‘इराज’ नाम संस्कृत मूल का है और इसके कई गहरे अर्थ हैं। यह नाम भगवान हनुमान से जुड़ा है, जिन्हें ‘पवन पुत्र’ (वायु के पुत्र) के रूप में जाना जाता है, क्योंकि ‘इराज’ का एक अर्थ ‘वायु से उत्पन्न’ है। इसके अलावा, यह नाम कामदेव, फूल, सुख और जल से उत्पन्न होने वाले व्यक्ति से भी संबंधित है, जो शक्ति, प्रेम और सकारात्मकता का प्रतीक है। बच्चे का जन्म मंगलवार को होने के कारण, जो हनुमान जी का दिन माना जाता है, इस नाम का चयन और भी खास हो जाता है।
परिवार में खुशी का माहौल
तेजस्वी यादव के घर दूसरी संतान के आगमन से लालू परिवार में खुशी का माहौल है। तेजस्वी ने पहले ही एक बेटी के पिता होने का सुख अनुभव किया है, जिसका नाम लालू यादव ने ‘कात्यायनी’ रखा था। कात्यायनी का जन्म नवरात्रि के छठे दिन हुआ था, जो देवी कात्यायनी का दिन माना जाता है। तेजस्वी ने एक साक्षात्कार में कहा, “मेरी बेटी का नाम मेरे पिता ने रखा था, और इस बार भी मेरे बेटे का नाम उन्होंने ही चुना। परिवार के सभी सदस्यों ने नाम सुझाए, लेकिन अंतिम फैसला मेरे पिता का ही रहा।”
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी इस अवसर पर तेजस्वी को बधाई दी। उन्होंने पटना के एक अस्पताल में नवजात को देखने के बाद कहा, “यह लालू परिवार के लिए खुशी का पल है। मैं तेजस्वी और उनके परिवार को हार्दिक शुभकामनाएं देती हूं।” तेजस्वी ने ममता बनर्जी का आभार व्यक्त करते हुए कहा, “मैं हनुमान जी का भक्त हूं और हमेशा से चाहता था कि मेरी पहली संतान बेटी हो, जो नवरात्रि में पैदा हुई। अब मेरे बेटे का जन्म हनुमान जी के दिन हुआ, जो मेरे लिए बहुत खास है।”
लालू यादव का सांस्कृतिक और धार्मिक जुड़ाव
लालू प्रसाद यादव ने हमेशा अपनी धार्मिक और सांस्कृतिक मान्यताओं को अपने परिवार और राजनीति में महत्व दिया है। उनके द्वारा चुने गए नाम, जैसे कात्यायनी और इराज, उनकी धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक मूल्यों को दर्शाते हैं। लालू यादव का यह कदम उनके समर्थकों के बीच भी चर्चा का विषय बना हुआ है, क्योंकि वे अपने बयानों और निर्णयों से हमेशा सुर्खियों में रहते हैं।
तेजस्वी यादव का बयान
तेजस्वी यादव ने इस मौके पर मीडिया से बातचीत में कहा, “हमारे परिवार में यह परंपरा रही है कि बच्चों के नाम मेरे पिता चुनते हैं। मेरी बेटी का नाम भी उन्होंने रखा था, और अब मेरे बेटे का नाम भी। यह हमारे लिए गर्व की बात है कि हमारे बच्चे सांस्कृतिक और धार्मिक मूल्यों से जुड़े नामों के साथ बड़े होंगे।” उन्होंने यह भी बताया कि परिवार के सभी सदस्यों ने नामकरण में हिस्सा लिया, लेकिन अंतिम निर्णय लालू यादव का ही रहा।
लालू यादव का राजनीतिक और सामाजिक प्रभाव
लालू प्रसाद यादव बिहार की राजनीति में एक बड़ा नाम हैं। 1990 से 1997 तक बिहार के मुख्यमंत्री और 2004 से 2009 तक केंद्र में रेल मंत्री रहे लालू ने अपने अनोखे अंदाज और सामाजिक न्याय की राजनीति से देशभर में पहचान बनाई। हालांकि, चारा घोटाले जैसे विवादों ने उनके करियर को प्रभावित किया, लेकिन उनका जनाधार, खासकर यादव और मुस्लिम समुदाय (MY फैक्टर) में, आज भी मजबूत है।

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