भगवान बिरसा मुंडा की 125वीं पुण्यतिथि: देशभर में आदिवासी नायक को श्रद्धांजलि

भगवान बिरसा मुंडा की 125वीं पुण्यतिथि: देशभर में आदिवासी नायक को श्रद्धांजलि

Author drishtinow | Edited by drishtinow
Updated: Mon, 09 Jun 2025 04:36 AM (IST)

देशभर में आज महान आदिवासी स्वतंत्रता सेनानी और समाज सुधारक भगवान बिरसा मुंडा की 125वीं पुण्यतिथि मनाई जा रही है। झारखंड के उलिहातू में जन्मे बिरसा मुंडा, जिन्हें ‘धरती आबा’ के नाम से भी जाना जाता है, ने 19वीं सदी में ब्रिटिश शासन और सामाजिक अन्याय के खिलाफ ‘उलगुलान’ (विद्रोह) का नेतृत्व किया। उनकी इस पुण्यतिथि पर, देशभर में लोग उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित कर रहे हैं और उनके सपनों को साकार करने का संकल्प ले रहे हैं।

15 नवंबर 1875 को जन्मे बिरसा मुंडा ने कम उम्र में ही अंग्रेजों के खिलाफ विद्रोह का बिगुल फूंका। उन्होंने आदिवासी समुदाय को अंधविश्वास, नशाखोरी, और सामाजिक कुरीतियों से मुक्त करने के लिए जागरूकता फैलाई। बिरसा ने ‘बिरसैत’ नामक आस्था की स्थापना की, जिससे आदिवासी अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़े और मिशनरियों के प्रभाव से बचे। उनके नेतृत्व में 1894 में शुरू हुआ उलगुलान आंदोलन आज भी अन्याय के खिलाफ लड़ाई की प्रेरणा है। 9 जून 1900 को रांची जेल में मात्र 25 वर्ष की आयु में उनका निधन हो गया, लेकिन उनकी विरासत अमर है।

झारखंड सरकार ने बिरसा मुंडा से जुड़े स्थलों को ‘बिरसा टूरिस्ट सर्किट’ के रूप में विकसित करने की योजना की घोषणा की है। उलिहातू, कोकर में उनकी समाधि, और अन्य महत्वपूर्ण स्थानों को पर्यटन स्थल के रूप में संवारा जाएगा, ताकि उनकी स्मृतियों को संरक्षित किया जा सके और आने वाली पीढ़ियां उनके योगदान से प्रेरणा लें।

भगवान बिरसा मुंडा की 125वीं पुण्यतिथि न केवल उनके बलिदान को याद करने का अवसर है, बल्कि उनके सपनों आदिवासी स्वशासन, सांस्कृतिक पहचान की रक्षा, और सामाजिक-आर्थिक समानता।को साकार करने का संकल्प लेने का भी दिन है। देशभर में लोग ‘उलगुलान’ की भावना को जीवित रखते हुए, धरती आबा को शत-शत नमन कर रहे हैं।

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