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भारत की जीडीपी ने Q1 में दर्ज की 7.8% की शानदार वृद्धि, ट्रंप के टैरिफ वार को दिया करारा जवाब

भारत की अर्थव्यवस्था ने वित्त वर्ष 2025-26 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में 7.8% की प्रभावशाली जीडीपी वृद्धि दर्ज की है, जो पिछले पांच तिमाहियों में सबसे अधिक है। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, यह प्रदर्शन अनुमानित 6.7% से कहीं अधिक है और पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही की 6.5% वृद्धि को भी पीछे छोड़ता है। यह शानदार प्रदर्शन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत पर लगाए गए 50% टैरिफ की चुनौती के बीच अर्थव्यवस्था की मजबूती को दर्शाता है।

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कृषि, विनिर्माण और सेवा क्षेत्र का शानदार योगदान

कृषि क्षेत्र ने इस तिमाही में 3.7% की वृद्धि दर्ज की, जो पिछले साल की समान अवधि में 1.5% थी। विनिर्माण क्षेत्र ने भी 7.7% की वृद्धि के साथ अपनी गति बरकरार रखी, जो पिछले साल 7.6% थी। सेवा क्षेत्र ने 9.3% की प्रभावशाली वृद्धि के साथ अर्थव्यवस्था को और बल प्रदान किया, जिसमें व्यापार, होटल, परिवहन, संचार और प्रसारण सेवाओं ने 8.6% की वृद्धि दर्ज की। वित्तीय, रियल एस्टेट और प्रोफेशनल सर्विसेज में 9.5% की वृद्धि देखी गई। हालांकि, खनन क्षेत्र में -3.1% और बिजली, गैस, जल आपूर्ति जैसे क्षेत्रों में 0.5% की मामूली वृद्धि रही।

चीन को पछाड़कर भारत सबसे तेजी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था

चीन की जीडीपी वृद्धि दर इस तिमाही में 5.2% रही, जबकि भारत ने 7.8% की वृद्धि के साथ दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्था के रूप में अपनी स्थिति को और मजबूत किया। यह उपलब्धि सरकारी खर्च में वृद्धि, सेवा क्षेत्र की तेजी और निवेश में निरंतर वृद्धि के कारण संभव हुई।

ट्रंप के टैरिफ के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था का दमखम

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत पर लगाए गए 50% के भारी-भरकम टैरिफ ने व्यापारिक चुनौतियां खड़ी की थीं, लेकिन भारतीय अर्थव्यवस्था ने इस चुनौती का डटकर मुकाबला किया। विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार को अब टैरिफ के प्रभाव को कम करने के लिए वैकल्पिक रणनीतियों पर ध्यान देना होगा, जैसे कि निर्यात बाजारों में विविधता और घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देना।

NSO के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 की पहली तिमाही में रियल जीडीपी 47.89 लाख करोड़ रुपये रही, जो पिछले साल की 44.42 लाख करोड़ रुपये से 7.8% अधिक है। नॉमिनल जीडीपी में 8.8% की वृद्धि दर्ज की गई, जो 86.05 लाख करोड़ रुपये तक पहुंची। निजी अंतिम उपभोग व्यय (PFCE) में 7.0% की वृद्धि देखी गई, जो पिछले साल की 8.3% से थोड़ा कम है।

विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार के पूंजीगत व्यय और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में निवेश ने अर्थव्यवस्था को गति दी है। साथ ही, सामान्य मानसून और ब्याज दरों में संभावित कटौती से अगले वित्त वर्ष में भी 6.7% की वृद्धि की उम्मीद है।

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