केसरवानी वैश्य समाज ने धूमधाम से मनाई सप्त महर्षि कश्यप मुनि की जयंती

केसरवानी वैश्य समाज ने धूमधाम से मनाई सप्त महर्षि कश्यप मुनि की जयंती

शंभू कुमार सिंह 

सिमडेगा : जिला केसरवानी वैश्य समाज ने सप्त महर्षि कश्यप मुनि की जयंती बड़े उत्साह और धूमधाम से मनाई। नगर भवन में आयोजित इस कार्यक्रम की अध्यक्षता जिला केसरवानी समाज के अध्यक्ष अनूप केसरी ने की। रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों के बीच आयोजित इस समारोह में समाज के लोगों ने एकता और उत्साह के साथ हिस्सा लिया।

कार्यक्रम का शुभारंभ महर्षि कश्यप मुनि के चित्र पर माल्यार्पण, दीप प्रज्वलन और आरती के साथ हुआ। जिला कांग्रेस के वरीय नेता प्रदीप केसरी ने अपने संबोधन में कहा कि समाज की प्रगति के लिए एकता, शिक्षा और आर्थिक उन्नति अहम है। उन्होंने केसरवानी समाज की व्यवसायिक उपलब्धियों की सराहना करते हुए शिक्षा और सामाजिक उत्थान के क्षेत्र में भी मिलकर कार्य करने का आह्वान किया। साथ ही, उन्होंने महर्षि कश्यप के जीवन और उनके योगदान पर प्रकाश डाला।

अन्य वक्ताओं ने बताया कि सप्त ऋषियों में से एक महर्षि कश्यप, ब्रह्मा के मानस पुत्र मरीचि के पुत्र थे। उनकी पत्नियों के माध्यम से दानव, मनुष्य, पशु, पक्षी, सर्प आदि सभी जीवों की उत्पत्ति हुई। कश्यप मुनि अपनी तपस्या, ज्ञान और निर्भीकता के लिए प्रसिद्ध थे। उनके नाम पर ही कश्मीर क्षेत्र का नाम “कश्यप मेरु” से “कश्यप” पड़ा। वे सृष्टि के सृजनकर्ता के रूप में जाने जाते हैं।

कार्यक्रम में बच्चों और महिलाओं ने मनमोहक नृत्य और भजन-गीत प्रस्तुत किए। समाज ने परीक्षाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले बच्चों को पुरस्कार देकर सम्मानित किया। इसके अलावा, जरूरतमंदों की सहायता के लिए एक ब्लड डोनर ग्रुप का गठन किया गया।

कार्यक्रम का मंच संचालन प्रदीप केसरी ने किया। इस अवसर पर संरक्षक उमा चरण केसरी, नंदकिशोर केसरी, परशुराम केसरी, नागेश्वर प्रसाद केसरी, राजकुमार केसरी, मुरारी केसरी, मनीष केसरी, सचिन संदीप केसरी, कोषाध्यक्ष राजू केसरी, अमित केसरी, धनंजय केसरी, अवधेश केसरी, बबलू केसरी, कैलाश प्रसाद, शिव केसरी, राजेश केसरी, मनोज केसरी, सुमित केसरी, दीपक केसरी, गोलू केसरी, सतीश केसरी सहित अन्य समाज के लोगों ने कार्यक्रम को सफल बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

तामरा, कुल्लूकेरा, बीरु, ठेठईटांगर, केरसाई और अन्य क्षेत्रों से बड़ी संख्या में लोग इस आयोजन में शामिल हुए। यह कार्यक्रम समाज की एकता और सांस्कृतिक विरासत को मजबूत करने का एक शानदार अवसर साबित हुआ।

ABOUT THE AUTHOR
drishtinow

drishtinow