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धनबाद: केंदुआडीह में जहरीली गैस रिसाव से हाहाकार, 6 हजार से अधिक लोग खतरे में ,भोपाल जैसी त्रासदी की आशंका, NH-रांची मार्ग भी जोखिम में

धनबाद: केंदुआडीह में जहरीली गैस रिसाव से हाहाकार, 6 हजार से अधिक लोग खतरे में ,भोपाल जैसी त्रासदी की आशंका, NH-रांची मार्ग भी जोखिम में

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धनबाद, 07 दिसंबर : झारखंड के धनबाद जिले के केंदुआडीह क्षेत्र में पुरानी कोयला खदान से निकल रही जहरीली कार्बन मोनोऑक्साइड (CO) गैस ने पूरे इलाके को मौत का तांडव मचा रखा है। अब तक दो महिलाओं की जान जा चुकी है जबकि 50 से अधिक लोग गंभीर रूप से बीमार हैं। कोल इंडिया के तकनीकी निदेशक ने साफ चेतावनी दी है, “गैस का रिसाव कम नहीं होगा, बल्कि लगातार बढ़ेगा। लोग तुरंत इलाका खाली करें।”

अच्युत घटक – तकनिकी निदेशक – कोल इंडिया

चौथे दिन भी नहीं थमा रिसाव, CO का स्तर 1,500 PPM तक पहुंचा

बीसीसीएल की बंद पड़ी केंदुआडीह कोलियरी की भूमिगत गैलरियों में वर्षों से सुलग रही आग के कारण कार्बन मोनोऑक्साइड, कार्बन डाईऑक्साइड और मीथेन जैसी जानलेवा गैसें जमा हो गई थीं। अब ये गैसें कमजोर सतह से रिसकर बाहर आ रही हैं। डीजीएमएस और सिन्फर के विशेषज्ञों ने शनिवार-रविवार को जांच में कई जगहों पर CO का स्तर 1,500 PPM तक दर्ज किया, जो सामान्य से 50 गुना अधिक और इंसान के लिए तुरंत घातक है।

रिसाव के मुख्य स्थान:
राजपूत बस्ती
पांच नंबर इमाम बाड़ा
नया घोड़ा डेरा
थाना के पीछे का इलाका
जीएम बंगला के पास
नया डेरा नंबर-1 गेट

धनबाद-रांची NH भी खतरे में

गैस का धुआं इतना घना हो गया है कि धनबाद-रांची मुख्य मार्ग पर दृश्यता बेहद कम हो गई है। वाहन चालकों को विशेष सावधानी बरतने की चेतावनी जारी की गई है।

स्थानीय लोगों ने रविवार को आक्रोश में सड़क जाम भी कर दिया।

दो मौतें, दर्जनों अस्पताल में

प्रियंका देवी (28) और ललिता देवी (55) की गैस की चपेट में आने से मौत।
शहीद निर्मल महतो मेडिकल कॉलेज और सेंट्रल हॉस्पिटल में 12 से 35 मरीज भर्ती।
लक्षण: सांस लेने में तकलीफ, आंखों में जलन, चक्कर, उल्टी और बेहोशी।

प्रशासन की कार्रवाई

उपायुक्त आदित्य रंजन, एसएसपी, बीसीसीएल सीएमडी और कोल इंडिया के तकनीकी निदेशक ने मौके का मुआयना किया।
400 से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थान पर शिफ्ट किया गया।
केंदुआडीह मध्य विद्यालय और दुर्गा मंदिर मैदान में दो राहत शिविर शुरू, 200-200 लोगों की क्षमता।
बेलगड़िया टाउनशिप में स्थायी पुनर्वास की योजना।
स्वास्थ्य टीमें, एंबुलेंस और संकट प्रबंधन दल 24 घंटे तैनात।

कोल इंडिया की स्वीकारोक्ति

कोल इंडिया के तकनीकी निदेशक ने कहा,
“हम तकनीकी टीम के साथ मिलकर गैस रोकने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन फिलहाल गैस का दबाव बढ़ रहा है। मिट्टी भराई जैसे अस्थायी उपाय कारगर नहीं हैं। लोगों की जान से बड़ा कुछ नहीं, इसलिए सभी प्रभावित परिवार तुरंत सुरक्षित स्थान पर चले जाएं।”

राजनीतिक हलचल

सांसद ढुल्लू महतो ने रविवार को मौका मुआयना किया और तत्काल मुआवजा व स्थायी पुनर्वास का आश्वासन दिया। विपक्षी दल बीसीसीएल की घोर लापरवाही बता रहे हैं, क्योंकि यह इलाका एक साल पहले ही “डेंजर जोन” घोषित हो चुका था।

विशेषज्ञों की राय

खनन विशेषज्ञों के अनुसार, गैस को पूरी तरह रोकने के लिए भूमिगत वेंटिलेशन शाफ्ट, गैस निकासी पाइप या नियंत्रित ब्लास्टिंग जैसे बड़े इंजीनियरिंग हस्तक्षेप करने होंगे, जो कम से कम 15-20 दिन ले सकते हैं। तब तक लोगों का विस्थापन ही एकमात्र सुरक्षित उपाय है।अगर अगले 24-48 घंटों में ठोस कदम नहीं उठे तो यह संकट भोपाल गैस त्रासदी (1984) की तरह भयावह रूप ले सकता है। प्रशासन ने सभी नागरिकों से अपील की है कि अफवाहों पर ध्यान न दें और प्रशासन के निर्देशों का सख्ती से पालन करें।

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