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इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी से मची तबाही: मौतों का आंकड़ा 14 तक, हजारों प्रभावित

इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी से मची तबाही: मौतों का आंकड़ा 14 तक, हजारों प्रभावित

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इंदौर, 2 जनवरी – भारत के सबसे स्वच्छ शहर का तमगा लगातार 8 बार जीतने वाले इंदौर में दूषित पेयजल ने बड़ा संकट खड़ा कर दिया है। भागीरथपुरा इलाके में पाइपलाइन लीकेज से सीवेज का पानी पीने के पानी में मिलने से उल्टी-दस्त का प्रकोप फैला, जिससे अब तक 9 से 14 लोगों की मौत हो चुकी है और 1,400 से अधिक लोग प्रभावित हुए हैं।

मौतों का विवादित आंकड़ा स्थानीय लोगों और कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार 13-14 मौतें हो चुकी हैं, जिनमें बच्चे और बुजुर्ग शामिल हैं।

मेयर पुष्यमित्र भार्गव ने 7 मौतें मानीं।
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने शुरुआत में 4 बताईं, जबकि कुछ अधिकारियों ने 9-10 मौतों की पुष्टि की।
लैब रिपोर्ट्स ने 26 पानी के सैंपलों में बैक्टीरियल कंटेमिनेशन कन्फर्म किया है, जो सीवेज से आया।

कारण:
लापरवाही की पराकाष्ठाप्रारंभिक जांच में पता चला कि भागीरथपुरा पुलिस चौकी के पास बने टॉयलेट के नीचे पेयजल पाइपलाइन थी। टॉयलेट का वेस्ट सीधे पिट में जाता था, जिससे लीकेज होने पर सीवेज पानी मिल गया। महीनों से शिकायतें आ रही थीं, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। नर्मदा से आने वाला पानी प्रभावित हुआ।प्रशासन की कार्रवाईमुख्यमंत्री मोहन यादव ने अस्पतालों का दौरा किया, मृतकों के परिवारों को 2 लाख रुपये मुआवजा और मुफ्त इलाज का ऐलान किया।
एक अधिकारी बर्खास्त, दो सस्पेंड।
NHRC ने नोटिस जारी कर 2 हफ्ते में रिपोर्ट मांगी।
हाईकोर्ट ने मुफ्त इलाज और स्टेटस रिपोर्ट के आदेश दिए।
टैंकरों से पानी सप्लाई, पाइपलाइन रिपेयर की जा रही है। कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने इलाके का दौरा कर गलती मानी।

यह घटना इंदौर की “स्वच्छ शहर” की इमेज पर बड़ा सवालिया निशान लगा रही है। प्रभावित परिवारों में गुस्सा है और विपक्ष ने लापरवाही का आरोप लगाया है। प्रशासन ने पूरे शहर में पानी की रैंडम सैंपलिंग शुरू की है ताकि ऐसी घटना दोबारा न हो।

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