राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने ‘केरल फेस्ट’ के समापन समारोह को संबोधित किया
रांची : झारखंड के राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने आज रांची के कैराली स्कूल में मलयाली एसोसिएशन द्वारा आयोजित ‘केरल फेस्ट’ के समापन समारोह को संबोधित किया। इस अवसर पर राज्यपाल ने केरल को ज्ञान, दर्शन, संस्कृति और मानवीय मूल्यों की जीवंत भूमि बताते हुए जगद्गुरु आदि शंकराचार्य की जन्मभूमि के रूप में उसकी महत्ता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि अद्वैत वेदांत के माध्यम से केरल ने पूरे भारत को आध्यात्मिक एकता के सूत्र में बांधने का कार्य किया है, जो भारत की सांस्कृतिक एकता का प्रतीक है।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!राज्यपाल ने केरल को ‘ईश्वर का अपना देश’ कहते हुए उसके प्राकृतिक सौंदर्य, उच्च शिक्षा, सामाजिक समरसता और मानवीय मूल्यों की सराहना की। उन्होंने कहा कि केरल की भाषा, साहित्य, संगीत, नृत्य और कलाओं ने भारतीय संस्कृति को समृद्ध किया है। ‘केरल फेस्ट’ जैसे आयोजन इस विरासत के जीवंत उदाहरण हैं, जहां शास्त्रीय एवं लोक कलाएं, पारंपरिक वेशभूषा और विशिष्ट व्यंजन रांची की धरती पर प्रस्तुत किए गए। यह आयोजन सांस्कृतिक संवाद और सौहार्द का माध्यम बनकर ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ की भावना को साकार करता है।
राज्यपाल ने उल्लेख किया कि झारखंड-बिहार क्षेत्र में पहली बार इतने बड़े स्तर पर ‘केरल फेस्ट’ का आयोजन हुआ, जिसमें केरल से कलाकारों ने भाग लिया। ऐसे उत्सव युवा पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ते हैं और भारत की बहुरंगी संस्कृति से परिचित कराते हैं। उन्होंने मलयाली एसोसिएशन, रांची की 55 वर्षों की सामाजिक-सांस्कृतिक सक्रियता और कैराली स्कूल की शैक्षणिक उपलब्धियों की प्रशंसा की।
केरल की उच्च साक्षरता, स्वास्थ्य व्यवस्था और सामाजिक जागरूकता का जिक्र करते हुए राज्यपाल ने कहा कि समता, सह-अस्तित्व और सम्मान केरल समाज की आधारशिला हैं। मलयाली समाज के सेवा, शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र में योगदान, विशेषकर नर्सिंग सेवाओं की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि झारखंड सहित कई राज्यों में कार्यरत केरल की नर्सें सेवा-भाव की मिसाल हैं।
राज्यपाल ने विश्वास जताया कि मलयाली एसोसिएशन भविष्य में भी इसी समर्पण से सामाजिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियां जारी रखेगा।

















