पेसा नियमावली पर भाजपा का तीखा हमला: बाबूलाल मरांडी ने हेमंत सरकार पर लगाया आदिवासी परंपराओं को कमजोर करने का आरोप

पेसा नियमावली पर भाजपा का तीखा हमला: बाबूलाल मरांडी ने हेमंत सरकार पर लगाया आदिवासी परंपराओं को कमजोर करने का आरोप

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पेसा नियमावली पर भाजपा का तीखा हमला: बाबूलाल मरांडी ने हेमंत सरकार पर लगाया आदिवासी परंपराओं को कमजोर करने का आरोप
Babulal Marandi

रांची, 08 जनवरी : झारखंड में पेसा (पंचायत एक्सटेंशन टू शेड्यूल्ड एरियाज) नियमावली 2025 को लेकर सियासी बवाल थमने का नाम नहीं ले रहा है। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष एवं नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने हेमंत सोरेन सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार ने नियमावली में आदिवासी समाज की रूढ़िवादी विश्वास और उपासना पद्धति को जानबूझकर कमजोर किया है। इससे उन लोगों को भी ग्राम सभा अध्यक्ष बनने का रास्ता मिल जाएगा जो पारंपरिक आदिवासी आस्था को छोड़ चुके हैं।

मरांडी ने प्रेस बयान में कहा, “कांग्रेस नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने 1996 में पेसा एक्ट बनाया था, जिसका उद्देश्य देश की 700 से अधिक जनजातियों की कमजोर होती रूढ़िवादी परंपराओं को मजबूत करना था। लेकिन आज झारखंड में वही कांग्रेस सत्ता के लालच में आदिवासियों के अधिकारों पर डाका डाल रही है।” उन्होंने पेसा एक्ट की धारा 4(क) का हवाला देते हुए बताया कि राज्य विधान को रूढ़िजन्य विधि, सामाजिक-धार्मिक प्रथाओं और समुदाय के संसाधनों की परंपरागत प्रबंधन पद्धति के अनुरूप होना चाहिए।

उदाहरण देते हुए मरांडी ने कहा कि संथाल समाज मरांग बुरू और जाहिर आयो को मानता है तथा जाहिर थान और मांझी थान में पूजा करता है। इसी तरह मुंडा, उरांव, हो और खड़िया समुदायों की अपनी अलग-अलग आस्था और उपासना पद्धतियां हैं। एक्ट के अनुसार, ग्राम सभा का अध्यक्ष वही बन सकता है जो इन रूढ़िवादी विश्वासों से जुड़ा हो। लेकिन हेमंत सरकार की नियमावली में “रूढ़िवादी” शब्द को हटाकर या अस्पष्ट रखकर आदिवासी समाज की आंखों में धूल झोंकी गई है।

भाजपा नेता ने मुख्यमंत्री से अपील की कि नियमावली में पेसा एक्ट की मूल भाषा को अक्षरशः शामिल किया जाए। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा, “यदि सरकार पुनर्विचार नहीं करती तो भाजपा गांव-गांव जाकर जनता की अदालत में यह मुद्दा ले जाएगी और आदिवासियों को जागरूक करेगी।”

 

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