झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य सूचना आयोग को लेकर सख्त रुख अपनाया, मुख्य सचिव कोर्ट में पेश हुए
झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य सूचना आयोग को लेकर सख्त रुख अपनाया, मुख्य सचिव कोर्ट में पेश हुए
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!रांची, — झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य सूचना आयोग (Jharkhand State Information Commission) की लंबे समय से निष्क्रियता पर कड़ी नाराजगी जताई है। सुनवाई के दौरान मुख्य सचिव अविनाश कुमार और कार्मिक, प्रशासनिक सुधार एवं राजभाषा विभाग के सचिव को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में उपस्थित होना पड़ा। राज्य सरकार ने कोर्ट को आश्वासन दिया है कि चार सप्ताह (एक महीने) के भीतर सूचना आयोग पूरी तरह कार्यशील हो जाएगा।
जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद और जस्टिस अरुण कुमार राय की खंडपीठ में बीरेंद्र सिंह की अपील याचिका पर सुनवाई हुई। याचिकाकर्ता ने RTI अधिनियम-2005 के तहत जानकारी मांगी थी, लेकिन सूचना न मिलने पर प्रथम अपील और फिर दूसरी अपील राज्य सूचना आयोग में दायर की गई। आयोग में मुख्य सूचना आयुक्त और सूचना आयुक्तों की नियुक्ति न होने के कारण यह लंबे समय से बंद पड़ा है, जिससे अपील लंबित हो गईं।
कोर्ट ने पहले 12 दिसंबर 2025 को आयोग को सक्रिय करने का निर्देश दिया था, लेकिन कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। खंडपीठ ने कहा कि सूचना का अधिकार संवैधानिक अधिकार है, जो पारदर्शिता, सुशासन और जवाबदेही से जुड़ा है। आयोग के निष्क्रिय रहने से नागरिकों को वैधानिक मंच नहीं मिल पा रहा, जिससे हाईकोर्ट पर अनावश्यक बोझ बढ़ रहा है।
महाधिवक्ता राजीव रंजन ने कोर्ट को बताया कि सूचना आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया अंतिम चरण में है और चार सप्ताह में आयोग फंक्शनल हो जाएगा। खंडपीठ ने सरकार के आग्रह को स्वीकार करते हुए समय दिया। मामले की अगली सुनवाई 27 फरवरी 2026 को निर्धारित की गई है।
यदि समयसीमा में आयोग सक्रिय नहीं हुआ, तो अवमानना की कार्रवाई हो सकती है।झारखंड राज्य सूचना आयोग मई 2020 से लगभग 5.5 वर्षों से निष्क्रिय है, जिसके कारण हजारों RTI अपील और शिकायतें लंबित हैं।

















