झारखंड इकोनॉमिक सर्वे 2024-25: गजब ...खनिज प्रधान राज्य अब बन रहा 'सर्विस हब', गरीबी में भी आई बड़ी गिरावट

झारखंड इकोनॉमिक सर्वे 2024-25: गजब …खनिज प्रधान राज्य अब बन रहा ‘सर्विस हब’, गरीबी में भी आई बड़ी गिरावट

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झारखंड इकोनॉमिक सर्वे 2024-25: गजब …खनिज प्रधान राज्य अब बन रहा ‘सर्विस हब’, गरीबी में भी आई बड़ी गिरावट

झारखंड इकोनॉमिक सर्वे 2024-25: गजब ...खनिज प्रधान राज्य अब बन रहा 'सर्विस हब', गरीबी में भी आई बड़ी गिरावट

रांची: झारखंड की अर्थव्यवस्था अब अपनी पुरानी पहचान (खनिज और भारी उद्योग) से बाहर निकलकर एक आधुनिक स्वरूप ले रही है। विधानसभा के बजट सत्र के दौरान पेश की गई आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट (Economic Survey Report) ने राज्य की तरक्की की एक नई और उत्साहजनक तस्वीर पेश की है।
यहाँ इस रिपोर्ट के 5 सबसे महत्वपूर्ण बिंदु दिए गए हैं जो हर झारखंडी को जानने चाहिए:
1. सेवाओं का बोलबाला: उद्योगों को छोड़ा पीछे
झारखंड की अर्थव्यवस्था में सबसे बड़ा बदलाव ‘सेक्टर’ के स्तर पर आया है। अब राज्य की कमाई का सबसे बड़ा जरिया खेती या कारखाने नहीं, बल्कि सर्विसेज सेक्टर (सेवा क्षेत्र) है।

सर्विसेज का योगदान: GSVA में सेवा क्षेत्र की हिस्सेदारी बढ़कर 45.56% हो गई है।
ग्रोथ इंजन: वित्तीय सेवाओं (Banking & Finance) ने 11% से 19% की शानदार वृद्धि दर्ज की है।
तुलना: 2011-12 में यह योगदान केवल 38.54% था।
2. प्रति व्यक्ति आय: ₹75,000 के पार पहुँचने का अनुमान
राज्य के आम नागरिक की आर्थिक स्थिति में भी सुधार के संकेत हैं। सर्वे के अनुसार:
2025-26 (अनुमान): ₹71,994 सालाना।
2026-27 (अनुमान): ₹75,670 सालाना।
राज्य की विकास दर (7.02%) राष्ट्रीय औसत (6.5%) से भी अधिक रही है, जो एक मजबूत अर्थव्यवस्था का प्रतीक है।
3. गरीबी के मोर्चे पर बड़ी जीत: 13.29% की गिरावट
सामाजिक न्याय और विकास के मामले में झारखंड ने लंबी छलांग लगाई है। बहुआयामी गरीबी (Multidimensional Poverty) के आंकड़ों में भारी कमी आई है:
2015-16: 42.10% लोग गरीब थे।
2019-21: यह आंकड़ा घटकर 28.81% रह गया।
सफलता का श्रेय: सौभाग्य योजना (बिजली), स्वच्छ भारत (शौचालय) और जल जीवन मिशन (नल से जल) जैसी बुनियादी सुविधाओं को दिया गया है।
4. बजट का बढ़ता आकार और बेहतर मैनेजमेंट
झारखंड सरकार का खजाना साल दर साल बड़ा होता जा रहा है:
ऐतिहासिक उछाल: 2001 में मात्र ₹6,000 करोड़ का बजट अब बढ़कर ₹1,45,400 करोड़ (2025-26) तक पहुँचने वाला है।
खर्च का तरीका: सरकार अब स्थापना खर्च (सैलरी आदि) को घटाकर योजना मद (सड़क, अस्पताल, स्कूल) पर ज्यादा खर्च (करीब 60.7%) कर रही है।
5. वित्तीय अनुशासन: घाटा कंट्रोल में
इतना खर्च करने के बावजूद राज्य कर्ज के जाल में नहीं फंसा है। राजकोषीय घाटा (Fiscal Deficit) 2.81% रहा है, जो FRBM एक्ट द्वारा निर्धारित 3% की कानूनी सीमा के भीतर है।
24 फरवरी पर टिकी निगाहें
आर्थिक सर्वेक्षण के ये आंकड़े बताते हैं कि झारखंड की नींव मजबूत है। अब सबकी नजरें 24 फरवरी पर टिकी हैं, जब वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर वित्तीय वर्ष 2026-27 का पूर्ण बजट पेश करेंगे। उम्मीद की जा रही है कि सर्वे के इन सकारात्मक परिणामों का असर बजट में नई योजनाओं के रूप में दिखेगा।

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