ना खाता ना बही जो कहे संजीव सिंह वही सही ।कोयलांचल का ‘किंग’ रिटर्न: 8 साल का ‘वनवास’ खत्म,
ना खाता ना बही जो कहे संजीव सिंह वही सही ।कोयलांचल का ‘किंग’ रिटर्न: 8 साल का ‘वनवास’ खत्म,
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संजीव सिंह की सुनामी में उड़े दिग्गज!
धनबाद/बोकारो: झारखंड की राजनीति में आज एक नया इतिहास लिखा गया। इसे लोकतंत्र की ताकत कहें या ‘सिंह मेंशन’ का अटूट तिलिस्म, लेकिन धनबाद और चास नगर निगम चुनाव के नतीजों ने दिल्ली और रांची में बैठी बड़ी राजनीतिक पार्टियों के रणनीतिकारों को सोचने पर मजबूर कर दिया है।
आपको यह जानना जरूरी है
संजीव सिंह का चमत्कार: 8 साल जेल में बिताने और सबूतों के अभाव में बरी होने के बाद, निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में धनबाद के नए ‘मेयर’ चुने गए।
वोटों का गणित: संजीव सिंह को मिले 1,04,731 वोट, निकटतम प्रतिद्वंद्वी चंद्रशेखर अग्रवाल को 31,902 मतों के भारी अंतर से हराया।
मिशन 2029: मेयर की कुर्सी संभालते ही संजीव सिंह ने 2029 लोकसभा चुनाव की हुंकार भर दी है।
सिंह मेंशन: विरासत, विवाद और विजय
धनबाद की राजनीति और ‘सिंह मेंशन’ का चोली-दामन का साथ रहा है। पूर्व विधायक स्वर्गीय सूरजदेव सिंह की विरासत को संजीव सिंह ने एक बार फिर साबित कर दिया है। 2017 में नीरज सिंह हत्याकांड में जेल जाने के बाद कई अटकलें लगाई जा रही थीं कि मेंशन का दबदबा खत्म हो जाएगा, लेकिन:
2024 में बहू रागिनी सिंह की झरिया से जीत।
2025 में संजीव सिंह की सम्मानजनक रिहाई।
2026 में खुद संजीव सिंह का मेयर बनना।
ये तीन कड़ियाँ बताती हैं कि कोयलांचल की जनता आज भी इस परिवार के साथ मजबूती से खड़ी है।
यह मेरी जीत नहीं, धनबाद की जनता का इंसाफ है। जिन्होंने मेरे संघर्ष को अपना समझा, यह जीत उन्हें समर्पित है।” — संजीव सिंह, नवनिर्वाचित मेयर
क्या बदलेगी धनबाद की सूरत?
अपनी जीत के बाद संजीव सिंह ने साफ कर दिया कि उनका फोकस अब ‘सफाई, पानी और स्ट्रीट लाइट’ पर होगा। उन्होंने ‘क्लीन-ग्रीन धनबाद’ का नारा दिया है। राजनीति के जानकारों का मानना है कि मेयर के रूप में संजीव सिंह का यह कार्यकाल झारखंड की आगामी विधानसभा और लोकसभा राजनीति की दिशा तय करेगा।

















