20260320 103131

सरकार ने लागू किया आवश्यक वस्तु अधिनियम: तेल-गैस कंपनियों को PPAC में डेटा साझा करना होगा अनिवार्य, उल्लंघन पर जेल की सजा संभव

नई दिल्ली : पश्चिम एशिया (वेस्ट एशिया) में चल रहे युद्ध के कारण वैश्विक स्तर पर तेल और प्राकृतिक गैस की आपूर्ति प्रभावित हो रही है, जिससे ऊर्जा संकट गहरा गया है। इस स्थिति में भारत सरकार ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 की धारा-3 के तहत एक राजपत्र अधिसूचना जारी की है।

WhatsApp Group Join Now
Telegram Group Join Now
Instagram Group Join Now
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!

इस अधिसूचना के माध्यम से पेट्रोलियम उत्पादों (पेट्रोल, डीजल, केरोसिन, एलपीजी आदि) और प्राकृतिक गैस के उत्पादन, प्रसंस्करण, शोधन, भंडारण, परिवहन, आयात-निर्यात, मार्केटिंग, वितरण और उपभोग से जुड़ी सभी कंपनियों (सार्वजनिक और निजी क्षेत्र की) को अपने नवीनतम डेटा पेट्रोलियम योजना और विश्लेषण प्रकोष्ठ (PPAC) में अनिवार्य रूप से साझा करना होगा।

PPAC, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय का प्रमुख डेटा संग्रहण और विश्लेषण विभाग है। मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने बताया कि इस कदम से सरकार को आपात स्थिति में बेहतर योजना बनाने, आपूर्ति श्रृंखला की निगरानी करने और घरेलू स्तर पर ईंधन की उपलब्धता सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।

अधिसूचना के तहत कंपनियों को उत्पादन, आयात-निर्यात, स्टॉक स्तर, भंडारण, आपूर्ति, उपभोग आदि की विस्तृत जानकारी PPAC को नियमित रूप से (कुछ मामलों में दैनिक आधार पर) देनी होगी। यह आदेश राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा माना जा रहा है, इसलिए मौजूदा गोपनीयता या अनुबंध संबंधी बाध्यताएं लागू नहीं होंगी। धारा-3 के तहत जारी किसी भी आदेश का उल्लंघन अपराध माना जाएगा, जिसमें जुर्माना और जेल की सजा तक हो सकती है।

यह कदम वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता के बीच भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण है। सरकार का उद्देश्य घरेलू उपभोक्ताओं, विशेष रूप से घरेलू एलपीजी, सीएनजी और पीएनजी जैसे प्राथमिक क्षेत्रों को निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करना है।

Share via
Share via