Jharkhand Koderma Water Crisis, 

कोडरमा: विकास की फाइलों में गुम ‘कारी पहाड़ी’, दूषित पानी से प्यास बुझाने को मजबूर ग्रामीण

कोडरमा के मरकच्चो में गहराया जल संकट: कारी पहाड़ी के ग्रामीण नाले का दूषित पानी पीने को मजबूर। विकास के दावों के बीच बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे 10 परिवार। पूरी रिपोर्ट यहाँ पढ़ें।

Jharkhand Koderma Water Crisis, 

WhatsApp Group Join Now
Telegram Group Join Now
Instagram Group Join Now
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!

कोडरमा (kodarma):  एक तरफ जहाँ डिजिटल इंडिया और ‘हर घर नल से जल’ जैसी योजनाओं का ढिंढोरा पीटा जा रहा है, वहीं झारखंड के कोडरमा जिले से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है जो व्यवस्था को शर्मसार कर देने वाली है। मरकच्चो प्रखंड की डगरनवां पंचायत स्थित  कारी पहाड़ी  और  चटनिया दह गांव के लोग आज भी आदिम युग की तरह जीवन जीने को विवश हैं।

बर्तन धोने वाला पानी ही ‘पेयजल’

इन गांवों की स्थिति इतनी भयावह है कि यहाँ के करीब 10 परिवारों के 100 लोगों के पास स्वच्छ पानी का कोई स्रोत नहीं है। गांव की महिलाएं और बच्चे रोजाना उबड़-खाबड़ और पथरीले रास्तों से आधा किलोमीटर का सफर तय कर सोती नाला’ पहुँचते हैं। मजबूरी ऐसी है कि ग्रामीण पहले उसी नाले के दूषित पानी से बर्तन साफ करते हैं और फिर उसी गंदे पानी को पीने के लिए इस्तेमाल करते हैं।

बीमारियों का घर बनता जा रहा गांव

ग्रामीणों ने बताया कि बरसात के मौसम में उनकी मुश्किलें कई गुना बढ़ जाती हैं। नाले का पानी कीचड़युक्त और मटमैला हो जाता है, जिससे हैजा, डायरिया और त्वचा संबंधी बीमारियों का खतरा हमेशा बना रहता है। बिजली और स्वास्थ्य सुविधाओं के नाम पर भी यहाँ केवल सन्नाटा पसरा है।

कागजों पर सिमटा विकास

स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि उन्होंने कई बार जिला प्रशासन और क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों से मदद की गुहार लगाई, लेकिन आश्वासन के अलावा उन्हें कुछ नहीं मिला। ग्रामीणों का कहना है कि:
“सरकार की योजनाएं केवल फाइलों और कागजों पर दौड़ रही हैं, धरातल पर हमें आज भी एक बूंद शुद्ध पानी के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है।”

प्रशासनिक मौन पर सवाल

कारी पहाड़ी की यह स्थिति प्रशासन की संवेदनहीनता को दर्शाती है। सवाल यह उठता है कि आखिर जल जीवन मिशन जैसी महत्वकांक्षी योजनाएं इन दुर्गम क्षेत्रों तक क्यों नहीं पहुँच पाईं? क्या इन 100 ग्रामीणों की जान की कीमत सरकारी आंकड़ों से कम है?

 

Share via
Share via