भाजपा कार्यकर्ताओं के ‘लहू’ से सींचा गया है बंगाल का कमल : बाबूलाल मरांडी

रांची: नेता प्रतिपक्ष सह पूर्व मुख्यमंत्री Babulal Marandi ने पश्चिम बंगाल में भाजपा की जीत को चुनाव आयोग की मेहरबानी बताने वाले विपक्षी दलों पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लंबी पोस्ट लिखते हुए कहा कि बंगाल में भाजपा का कमल चुनाव आयोग की कृपा से नहीं, बल्कि पार्टी कार्यकर्ताओं के “लहू और बलिदान” से सींचा गया है।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!उन्होंने कहा कि कुछ लोग अब भी यह मानने को तैयार नहीं हैं कि पश्चिम बंगाल में भाजपा की ताकत कार्यकर्ताओं के संघर्ष और शहादत की बदौलत बढ़ी है। मरांडी ने लिखा कि जिन्हें लगता है कि ईवीएम, केंद्रीय बल या दिल्ली का दखल भाजपा को सत्ता तक लाया है, वे बंगाल की वास्तविक परिस्थितियों से अनजान हैं। उन्होंने कहा कि “बंगाल में कमल बैलेट बॉक्स से पहले कार्यकर्ताओं के खून से खिला है।”
“2011 से 2025 तक संघर्ष और बलिदान की यात्रा”
मरांडी ने अपनी पोस्ट को चार हिस्सों में बांटते हुए भाजपा कार्यकर्ताओं के संघर्ष, हिंसा और राजनीतिक लड़ाई का विस्तार से उल्लेख किया। पहले हिस्से “लाशों का अंबार और जलते हुए आशियाने” में उन्होंने दावा किया कि 2011 से 2025 तक का राजनीतिक सफर किसी सामान्य चुनावी यात्रा की तरह नहीं, बल्कि एक महायज्ञ रहा, जिसमें भाजपा कार्यकर्ताओं ने अपने प्राणों की आहुति दी।
उन्होंने आरोप लगाया कि बंगाल में लोकतंत्र की बात करने वालों को पेड़ों से लटकाया गया, बम से उड़ाया गया और कई कार्यकर्ताओं के शव क्षत-विक्षत हालत में मिले। मरांडी ने कहा कि नंदीग्राम, बीरभूम, कूचबिहार और बशीरहाट जैसे क्षेत्रों में सिर्फ भाजपा को समर्थन देने के कारण लोगों को निशाना बनाया गया।
“मौत भी नहीं डिगा सकी कार्यकर्ताओं का मनोबल”
अपने दूसरे हिस्से “चट्टान जैसा मनोबल: मौत भी जिसे डरा न सकी” में उन्होंने भाजपा कार्यकर्ताओं के साहस का जिक्र करते हुए कहा कि जिस बूथ अध्यक्ष की लाश सुबह पेड़ पर लटकी मिलती थी, उसी परिवार का बेटा दोपहर में पोलिंग एजेंट बनकर बूथ पर खड़ा हो जाता था। उन्होंने कहा कि यह हिम्मत किसी चुनाव आयोग से नहीं, बल्कि आत्मसम्मान और विचारधारा से आती है।।मरांडी ने वामपंथी शासन के 34 वर्षों और तृणमूल कांग्रेस के 15 वर्षों को “दमन और भय की राजनीति” करार देते हुए कहा कि भाजपा कार्यकर्ताओं ने फर्जी मुकदमे, जेल और सामाजिक बहिष्कार तक झेला, लेकिन उनके कदम नहीं डगमगाए।
“शून्य से शिखर तक पहुंची भाजपा”
तीसरे हिस्से “15 साल की तपस्या: शून्य से शिखर तक का रक्तरंजित सफर” में मरांडी ने पश्चिम बंगाल में भाजपा के राजनीतिक सफर का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि 2011 में भाजपा के सिर्फ एक विधायक थे और पार्टी का मजाक उड़ाया जाता था। 2016 में तीन विधायक जीतकर संघर्ष की शुरुआत हुई। 2019 में 18 लोकसभा सीटों की जीत ने ममता बनर्जी के गढ़ में सेंध लगा दी। 2021 में भाजपा 77 सीटें जीतकर मुख्य विपक्षी दल बनी और 2026 में पार्टी पूर्ण बहुमत तक पहुंच गई। उन्होंने कहा कि यह जीत उन परिवारों की है जिन्होंने अपने परिजनों को खोने के बावजूद संघर्ष जारी रखा और सत्ता परिवर्तन तक लड़ाई लड़ने का संकल्प लिया।
“यह जीत शहीद कार्यकर्ताओं के बलिदान की”
पोस्ट के अंतिम हिस्से “यह गिफ्ट नहीं, शहीदों का बलिदान है” में मरांडी ने कहा कि जो लोग भाजपा की जीत को “चुनाव आयोग की सेटिंग” बताते हैं, उन्हें उन श्मशानों और कब्रों तक जाना चाहिए जहां भाजपा का झंडा ओढ़े कार्यकर्ता दफन हैं।
उन्होंने कहा कि बंगाल में सत्ता किसी मशीन ने नहीं दिलाई, बल्कि हर वोट के पीछे किसी न किसी कार्यकर्ता का संघर्ष और बलिदान जुड़ा हुआ है। मरांडी ने इसे बंगाल के आत्मसम्मान और भाजपा कार्यकर्ताओं के त्याग की जीत बताया।















