Major Security Lapse for Leader of Opposition Babulal Marandi

झारखंड: नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी की सुरक्षा में बड़ी चूक, कारकेड की गाड़ी फिर हुई खराब; सरकार पर लापरवाही के आरोप

हजारीबाग के पदमा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी के कारकेड की गाड़ी फिर हुई खराब। भारी बारिश के बीच एक घंटे फंसे रहे मरांडी। सुरक्षा में बड़ी चूक और सरकार की अनदेखी पर उठे सवाल।

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हजारीबाग/रांचीझारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी की सुरक्षा व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में है। हजारीबाग के चौपारण से रांची लौटने के दौरान शनिवार को इटखोरी मोड़ (पदमा) के पास उनके कारकेड में शामिल जिप्सी अचानक खराब हो गई। मूसलाधार बारिश के बीच बाबूलाल मरांडी को करीब एक घंटे तक बीच सड़क पर फंसे रहना पड़ा।

बीच सड़क एक घंटे तक ठप रहा काफिला

मिली जानकारी के अनुसार, बाबूलाल मरांडी चौपारण से एक कार्यक्रम के बाद रांची लौट रहे थे। इसी दौरान पदमा के पास उनके काफिले की एक गाड़ी ने जवाब दे दिया। सुरक्षाकर्मियों ने काफी मशक्कत के बाद गाड़ी की मरम्मत की, जिसके बाद वे अपने गंतव्य के लिए रवाना हो सके। बारिश और असुरक्षित क्षेत्र में इस तरह वाहन का खराब होना किसी बड़े खतरे को दावत देने जैसा है।

बार-बार खराब हो रही हैं गाड़ियाँ: “कंडम” हो चुका है काफिला

यह कोई पहली घटना नहीं है। इससे पहले इसी साल जनवरी में तिलैया में भी उनके काफिले की गाड़ी खराब हुई थी। सूत्रों के अनुसार, बाबूलाल मरांडी को आवंटित सरकारी बुलेटप्रूफ गाड़ी और सुरक्षा में तैनात अन्य गाड़ियाँ जर्जर अवस्था में पहुँच चुकी हैं।
ये गाड़ियाँ लगभग 10 से 12 साल पुरानी हैं।
अब तक ये वाहन  2 लाख किलोमीटर से अधिक चल चुके हैं।

मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर भी नहीं हुई कार्रवाई

बाबूलाल मरांडी ने इस समस्या को लेकर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पहले ही पत्र लिखकर आगाह किया था। उन्होंने अपने पत्र में उल्लेख किया था कि:
1. सरकार ने सुरक्षा के लिए  17 नई बुलेटप्रूफ गाड़ियाँ खरीदी हैं, जिनमें से मात्र 3-4 का ही उपयोग हो रहा है।
2. पुरानी गाड़ियाँ बार-बार खराब होने से प्रवास के दौरान सुरक्षा का गंभीर संकट पैदा होता है।
3. उन्होंने सुझाव दिया था कि यदि नई गाड़ियाँ आवंटित नहीं करनी हैं, तो उन्हें वरीय अफसरों को दे दिया जाए ताकि वे खड़े-खड़े खराब न हों।

राज्य सरकार पूर्व मुख्यमंत्रियों की जान के साथ खिलवाड़ कर रही है। जब नई गाड़ियाँ उपलब्ध हैं, तो जर्जर वाहनों के सहारे नेता प्रतिपक्ष की सुरक्षा को खतरे में डालना समझ से परे है।”

सुरक्षा पर उठते गंभीर सवाल

बाबूलाल मरांडी अक्सर राज्य के सुदूर और नक्सल प्रभावित इलाकों का दौरा करते हैं। ऐसे में उनके काफिले की गाड़ियों का बार-बार खराब होना जिला प्रशासन और गृह विभाग की बड़ी लापरवाही को दर्शाता है। भारी बारिश और रात के अंधेरे में सुरक्षा व्यवस्था का इस तरह चरमराना किसी भी अप्रिय घटना का कारण बन सकता है।
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