असम में हेमंत सोरेन के हेलीकॉप्टर को नहीं मिली उड़ान की अनुमति, फोन के जरिए जनसभा को किया संबोधित
असम में हेमंत सोरेन के हेलीकॉप्टर को नहीं मिली उड़ान की अनुमति, फोन के जरिए जनसभा को किया संबोधित

गुवाहाटी/रांची: असम विधानसभा चुनाव में चुनाव प्रचार के लिए पहुंचे झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के तूफानी दौरे में उस समय बाधा आ गई, जब सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए उनके हेलीकॉप्टर को उड़ान भरने की अनुमति नहीं दी गई। सोमवार को निर्धारित दो चुनावी सभाओं में न पहुंच पाने के कारण मुख्यमंत्री ने मोबाइल फोन के जरिए जनता से संवाद किया।
सुरक्षा का हवाला और ‘नो-फ्लाई जोन’
जानकारी के मुताबिक, सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी असम के दौरे पर थे। प्रशासन ने पीएम की सुरक्षा और प्रोटोकॉल का हवाला देते हुए हेमंत सोरेन के हेलीकॉप्टर को टेक-ऑफ की अनुमति नहीं दी। इसके चलते मुख्यमंत्री अपनी निर्धारित रैलियों में शारीरिक रूप से उपस्थित नहीं हो सके।
“यह बदलाव की आहट है”
सभा स्थल पर मौजूद समर्थकों को निराश न करते हुए हेमंत सोरेन ने फोन के माध्यम से भाषण दिया। उन्होंने सत्ता पक्ष पर निशाना साधते हुए कहा:
“जनता का यह अपार समर्थन बता रहा है कि असम में बदलाव की लहर चल रही है। हमें रोकने की कोशिशें की जा रही हैं, लेकिन जनता के बीच जाने से हमें कोई नहीं रोक सकता।”
कल्पना सोरेन ने भी लगाया ‘साजिश’ का आरोप
हेमंत सोरेन से ठीक एक दिन पहले, रविवार को उनकी पत्नी और झामुमो नेता कल्पना सोरेन के साथ भी ऐसी ही घटना घटी थी। तीन में से दो सभाओं के लिए उनके हेलीकॉप्टर को अनुमति नहीं दी गई। कल्पना सोरेन ने इस पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए इसे “सरकार की साजिश” करार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष की आवाज दबाने के लिए जानबूझकर प्रचार में बाधा डाली जा रही है।
प्रमुख बिंदु:
लगातार दूसरे दिन रोक: रविवार को कल्पना सोरेन और सोमवार को हेमंत सोरेन के कार्यक्रम प्रभावित हुए।
तकनीकी कारण: प्रधानमंत्री के दौरे की वजह से क्षेत्र को ‘नो-फ्लाई जोन’ घोषित किया गया था।
JMM का रुख:
झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) इसे तानाशाही और प्रचार रोकने का हथकंडा बता रहा है।
चुनाव प्रचार के अंतिम दौर में इस “हेलीकॉप्टर विवाद” ने असम की राजनीति में गर्माहट पैदा कर दी है। अब देखना यह है कि जेएमएम इस मुद्दे को जनता के बीच किस तरह ले जाती है।

















