20260407 195957

असम (Asam) चुनाव 2026: विकास के वादों से ”व्यक्तिगत बदले’ में बदल गई है सियासत? सिर्फ JMM अपने T-Tribe के मुद्दे पर अडिग रहा। 

असम (Asam) चुनाव 2026: विकास के वादों से ”व्यक्तिगत बदले’ में बदल गई है सियासत? सिर्फ JMM अपने T-Tribe के मुद्दे पर अडिग रहा। 

WhatsApp Group Join Now
Telegram Group Join Now
Instagram Group Join Now
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!

20260407 195957

गुवाहाटी/रांची: असम विधानसभा चुनाव के पहले चरण की वोटिंग 9 अप्रैल को होनी है, लेकिन चुनाव प्रचार के आखिरी दौर में राज्य का राजनीतिक तापमान ‘हिमालयी ऊंचाइयों’ को छू रहा है। जो चुनाव कुछ महीने पहले सड़कों, स्कूलों और जुबिन गर्ग की दुखद मृत्यु जैसे इमोशनल मुद्दों पर शुरू हुआ था, वह आज ‘गोल्डन पासपोर्ट’, ‘नो फ्लाई ज़ोन’ और ‘हंट डाउन’ जैसे व्यक्तिगत हमलों पर आकर टिक गया है।

1. ‘अस्तित्व की लड़ाई’ और ध्रुवीकरण का चरम

मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने इस चुनाव को सीधे तौर पर असमिया अस्मिता और जनसांख्यिकीय बदलाव (Demographic Change) से जोड़ दिया है। भाजपा के प्रचार में ‘No Mercy’ और ‘Hunt Down’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना रहा।
दूसरी ओर, विपक्ष (कांग्रेस और AIUDF) इसे ‘डर की राजनीति’ करार दे रहा है। हालांकि, रेजौल करीम सरकार जैसे नेताओं के विवादास्पद बयानों (“शिवसागर को धुबरी बना देंगे”) ने भाजपा को आक्रामक होने का और मौका दे दिया है, जिससे चुनावी ध्रुवीकरण अपने चरम पर पहुँच गया है।

2. गोल्डन पासपोर्ट विवाद: घर की दहलीज तक पहुंची जंग
इस बार की सियासी जंग नीतियों से निकलकर ‘निजी तिजोरियों’ तक पहुँच गई है। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा के एक सनसनीखेज आरोप ने असम से दिल्ली तक हड़कंप मचा दिया।

आरोप:  खेड़ा ने दावा किया कि सीएम की पत्नी रिनिकी भुइयां सरमा के पास तीन देशों के ‘गोल्डन पासपोर्ट’ और 52,000 करोड़ की विदेशी संपत्ति है।

पलटवार: सीएम सरमा ने इन आरोपों को ‘पाकिस्तानी प्रोपेगेंडा’ करार देते हुए मानहानि का केस दर्ज कराया है।

3. झारखंड बनाम असम: सोरेन और सरमा के बीच ‘बदले’ की राजनीति
असम के चुनावी आसमान में इस बार झारखंड की गूँज सुनाई दे रही है। जानकार इसे ‘पॉलिटिकल रिटर्न्स’ कह रहे हैं।

झारखंड का असर:  पिछले साल झारखंड चुनाव में हिमंता बिस्वा सरमा ने जिस तरह रांची की गलियों में पसीना बहाया था, अब हेमंत सोरेन उसका ‘ब्याज’ वसूलने असम उतरे हैं।

नो फ्लाई ज़ोन विवाद:  असम में हेमंत और कल्पना सोरेन के हेलीकॉप्टर को ‘नो फ्लाई ज़ोन’ के कारण लैंडिंग में हुई देरी ने नई सियासी चिंगारी सुलगा दी है। झामुमो (JMM) इसे तकनीकी मजबूरी नहीं, बल्कि बदले की भावना बता रहा है।

4. गायब हुए बुनियादी मुद्दे?

विश्लेषकों का मानना है कि इस ‘हाई-वोल्टेज ड्रामे’ के बीच असम के असली मुद्दे कहीं पीछे छूट गए हैं:

चाय बागान मजदूरों की मजदूरी का सवाल।
सालाना बाढ़ की विभीषिका का स्थायी समाधान।
बेरोजगारी और राज्य का आर्थिक रोडमैप।

 

असम की राजनीति में ‘जाति-माटी-भेटी’ का नारा पुराना है, लेकिन 2026 का यह चुनाव ‘व्यक्तिगत दुश्मनी’ के एक नए स्तर पर है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि यह चुनाव केवल सत्ता की चाबी पाने के लिए नहीं है, बल्कि हारने वाले के लिए कानूनी शिकंजा कसने की शुरुआत भी हो सकता है।

Share via
Share via