सर! हमें पढ़ना है, प्लीज मेरी मदद कीजिए”: बोकारो की प्रिया की इस गुहार ने झकझोर दिया सबका दिल
सर! हमें पढ़ना है, प्लीज मेरी मदद कीजिए”: बोकारो की प्रिया की इस गुहार ने झकझोर दिया सबका दिल
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इंजीनियर बनना चाहती है यह बेटी, पर गरीबी बनी बाधा। स्कूल ने निकाला बाहर। क्या हेमंत सोरेन और बोकारो डीसी सुनेंगे प्रिया की पुकार?”
बोकारो: एक तरफ देश में महिला सशक्तिकरण और 33% महिला आरक्षण के बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ झारखंड की एक बेटी शिक्षा के लिए दर-दर भटकने को मजबूर है। बोकारो के सेक्टर 4/G की रहने वाली प्रिया कुमारी की आंखों में इंजीनियर बनने का सपना तो है, लेकिन गरीबी ने उसके कदमों में बेड़ियां डाल दी हैं।
स्कूल ने निकाला बाहर, प्रिंसिपल ने सुनाई खरी-खोटी
प्रिया कुमारी सेक्टर 8/B स्थित एक नामी पब्लिक स्कूल की छात्रा थी। प्रिया ने बताया कि उसके पिता का सड़क दुर्घटना में कमर टूटने के कारण घर की आर्थिक स्थिति पूरी तरह चरमरा गई है। घर में खाने के लाले पड़े हैं, ऐसे में स्कूल की फीस देना नामुमकिन हो गया। फीस जमा न होने के कारण स्कूल प्रबंधन ने न केवल उसे कक्षा 8 की परीक्षा देने से रोका, बल्कि स्कूल से भी बाहर निकाल दिया। प्रिया जब दोबारा विनती करने स्कूल पहुंची, तो वहां की प्रिंसिपल ने उसे खरी-खोटी सुनाकर स्कूल से वापस भेज दिया।
मुख्यमंत्री और डीसी से लगाई न्याय की गुहार
अपनी पढ़ाई टूटने से आहत प्रिया ने अब झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और बोकारो डीसी अजय नाथ झा से हाथ जोड़कर मदद की अपील की है। सिसकते हुए प्रिया ने कहा:
“सर, मेरी आर्थिक स्थिति बहुत खराब है लेकिन मैं पढ़ना चाहती हूं। मेरे पिता काम करने में असमर्थ हैं। मैं इंजीनियर बनकर अपने परिवार का सहारा बनना चाहती हूं। कृपया मेरी मदद करें ताकि मैं दोबारा स्कूल जा सकूं।”
व्यवस्था पर खड़े होते बड़े सवाल
प्रिया की यह मार्मिक अपील अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है, जिसने आम लोगों का दिल पसीज दिया है। सवाल यह उठता है कि क्या “शिक्षा का अधिकार” (RTE) सिर्फ कागजों तक सीमित है? क्या एक मेधावी छात्रा का भविष्य सिर्फ कुछ रुपयों की फीस के कारण अंधकार में डूब जाएगा?
अब देखना यह है कि जिला प्रशासन और राज्य सरकार इस बेटी की चीख को कितनी गंभीरता से लेती है और क्या प्रिया को दोबारा कलम पकड़ने का मौका मिलता है।














