रांची: जातिगत राजनीति में उलझा समाज ! मंदिर के बगल में छलकते जाम और सिसकती बेटियाँ
रांची: जातिगत राजनीति में उलझा समाज, मंदिर के बगल में छलकते जाम और सिसकती बेटियां
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रांची: राजधानी के मेडिकल कॉलेज की छात्रा के साथ हुई दरिंदगी ने एक बार फिर पूरे झारखंड को झकझोर कर रख दिया है। लेकिन क्या इस आक्रोश के पीछे हम उस कड़वे सच को देख पा रहे हैं, जो हमारे समाज को भीतर ही भीतर खोखला कर रहा है? जी हां ऐसा ही नजारा रांची के कडरू इलाके में देखने को मिल रहा है जिसमे देवालय के साथ मदिरालय दिखाई दे रहा है । आप सोचिए समाज की माताएं, महिलाएं, बहने , बेटियां वहां पूजा करने जाएंगी तो वहां से टूल होकर नशे में निकलते लोग दिखाई देंगे । क्या यह हमारी माताएं बेटियों ले सुरक्षा पर प्रश्नचिन्ह नही है । समाज सेवी हिमांशु कुमार ने इस मुद्दे को खुलकर अपने सोशल मीडिया में उठाया है।
मंदिर की दीवार और मदिरालय का साथ: कडरू और New AG कॉलोनी का सच
रांची की सड़कों पर आज एक अजीबोगरीब और शर्मनाक दृश्य आम हो गया है। New AG कॉलोनी और कडरू जैसे इलाकों में स्थिति यह है कि एक तरफ आस्था का केंद्र ‘मंदिर’ है, तो ठीक उसकी दीवार से सटा हुआ ‘मदिरालय’ (बार) फल-फूल रहा है।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि इन बारों के भीतर जाने पर धर्म और संस्कारों की सारी मर्यादाएं धुआं हो जाती हैं। सवाल यह उठता है कि क्या प्रशासन और स्थानीय राजनेताओं को यह ‘अनोखा संगम’ दिखाई नहीं देता?
राजनीति की ‘सुविधाजनक’ खामोशी
इस पूरे मामले में राजनीतिक दलों की भूमिका पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। समाज सेवी हिमांशु कुमार का आरोप है कि:
विपक्ष (बीजेपी): केवल सरकार को घेरने और प्रेस कॉन्फ्रेंस करने तक सीमित है। क्या कभी इन मदिरालयों को धार्मिक स्थलों से दूर हटाने के लिए धरातल पर आंदोलन हुआ?
सत्ता पक्ष: मुख्यमंत्री कार्यालय के अधिकारियों की नाक के नीचे ये सब संचालित है, फिर भी कार्रवाई सिफर है।
स्थानीय जनप्रतिनिधि: हटिया विधायक नवीन जयसवाल जैसे नेताओं की चुप्पी पर भी जनता सवाल उठा रही है। क्या बेटियों की सुरक्षा से ज्यादा जरूरी राजस्व और लाइसेंस हैं?
बार कल्चर” और संस्कारों की बलि
समाज के एक वर्ग का मानना है कि केवल बाहरी दुश्मनों को ढूंढने से समाधान नहीं होगा। आज रांची के बारों में जिस तरह की संस्कृति पनप रही है, वह सीधे तौर पर अपराधों को निमंत्रण दे रही है।
“अगर हम वास्तव में अपने धर्म और संस्कृति के प्रति ईमानदार हैं, तो हमें अपने बच्चों को इस ‘बार कल्चर’ की गर्त में जाने से रोकना होगा। जब तक मांग रहेगी, ये मदिरालय चलते रहेंगे और हमारी बेटियां शिकार होती रहेंगी।” हिमांशु कुमार /समाजसेवी
सफेदपोशों का संरक्षण?
इस घटना के पीछे केवल वे अपराधी नहीं हैं जो पकड़े गए, बल्कि वह पूरा ‘रैकेट’ और ‘इकोसिस्टम’ है जो नशे और अनैतिकता के व्यापार को बढ़ावा देता है। चर्चा यह भी है कि इस तरह के कई गिरोहों को समाज के कुछ रसूखदार ‘सफेदपोश’ लोगों का संरक्षण प्राप्त है।
निष्कर्ष: अब जागने का वक्त है
केवल सोशल मीडिया पर विरोध दर्ज करने या इसे सांप्रदायिक रंग देने से समस्या खत्म नहीं होगी। रांची की जनता को एकजुट होकर उन बुनियादी वजहों (नशा और अनैतिक व्यापार) के खिलाफ आवाज उठानी होगी जो बलात्कार जैसी घटनाओं की जड़ हैं।














