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पूर्व से दक्षिण तक लोकतंत्र की बड़ी परीक्षा, 9.33 करोड़ मतदाता करेंगे फैसला

भारत की राजनीति के लिए 23 अप्रैल 2026 बेहद अहम दिन साबित होने जा रहा है। एक तरफ पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के पहले चरण की वोटिंग होगी, तो वहीं दूसरी ओर तमिलनाडु की सभी 234 सीटों पर एक ही दिन मतदान के जरिए सत्ता का फैसला किया जाएगा। पूर्व और दक्षिण भारत में शुरू हो रही यह चुनावी प्रक्रिया देश की सियासी दिशा तय करने वाली मानी जा रही है।

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बंगाल: पहले चरण में 152 सीटों पर मतदान

पश्चिम बंगाल में पहले चरण का मतदान बेहद अहम माना जा रहा है। इस चरण में 152 सीटों पर वोटिंग होगी जिसमें 3.6 करोड़ मतदाता करेंगे मतदान। प्रथम चरण में 1478 उम्मीदवार मैदान में और 44,000 से अधिक पोलिंग बूथ तैयार किए गए हैं। नंदीग्राम से लेकर दार्जिलिंग तक सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी के बीच सीधा मुकाबला है। पहले चरण का मतदान ही यह संकेत देगा कि राज्य में सत्ता की हवा किस ओर बह रही है।

तमिलनाडु: एक चरण में 234 सीटों पर फैसला

तमिलनाडु में इस बार मुकाबला काफी दिलचस्प हो गया है। पूरे राज्य में एक ही चरण में 234 सीटों पर मतदान होगा। मतदान में 5.73 करोड़ मतदाता अपना मत देंगे, जिनमें 2.93 करोड़ महिलाएं और 2.80 करोड़ पुरुष मतदाता शामिल हैं। 234 सीटों पर हो रहे मतदान में 4023 उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं। 75,000 से अधिक मतदान केंद्र बनाए गए हैं।

मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन की प्रतिष्ठा दांव पर है, वहीं पहली बार चुनावी मैदान में उतरी तमिलगा वेत्रि कझगम (TVK) भी मुकाबले को रोचक बना रही है। यहां सवाल यह है कि क्या द्रविड़ राजनीति का दबदबा कायम रहेगा या कोई नया समीकरण उभरेगा।

यह दिन सिर्फ चुनाव नहीं, बल्कि लोकतंत्र की सबसे बड़ी परीक्षा की शुरुआत है। बंगाल में क्या ‘दीदी’ का किला कायम रहेगा, या बीजेपी नई इबारत लिखेगी? वहीं तमिलनाडु में क्या पुरानी राजनीति जारी रहेगी या बदलाव की लहर उठेगी—इन सभी सवालों के जवाब अब मतपेटियों में कैद हो जाएंगे।

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