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5 करोड़ की जब्ती: क्यों डरे सीए साहब ? बीरेंद्र राम के CA ने हाईकोर्ट से पीछे खींचे कदम

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रांची: झारखंड की राजनीति और ब्यूरोक्रेसी में भूचाल लाने वाले वीरेंद्र राम केस में एक नया मोड़ आया है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) के बढ़ते दबाव और ठोस सबूतों के बीच, निलंबित चीफ इंजीनियर वीरेंद्र राम के चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) मुकेश मित्तलने झारखंड हाईकोर्ट से अपनी याचिका वापस ले ली है।

5 करोड़ की जब्ती: क्यों डरे सीए साहब?

मुकेश मित्तल ने ED द्वारा उनके बैंक खातों से 5 करोड़ रुपये फ्रीज किए जाने के आदेश को चुनौती दी थी। कानूनी गलियारों में चर्चा है कि कोर्ट से राहत मिलने की जगह फटकार लगने की आशंका के कारण मित्तल ने अपने कदम पीछे खींचना ही बेहतर समझा।

ED की फाइल से निकले 3 बड़े खुलासे 1. ‘ढाई परसेंट’ का खेल

पूछताछ में यह चौंकाने वाली बात सामने आई है कि मुकेश मित्तल केवल सीए नहीं थे, बल्कि वे वीरेंद्र राम की काली कमाई को सफेद करने वाले ‘मैनेजर’ की भूमिका में थे। उन्होंने स्वीकार किया कि वीरेंद्र राम के पिता के खाते में कैश मैनेज करने के बदले उन्होंने 2.5% कमीशन तय किया था।

2. फर्जी PAN और शेल कंपनियों का जाल

करोड़ों रुपये इधर से उधर करने के लिए किसी ‘सचिन गुप्ता’ के नाम पर फर्जी पैन कार्ड और नकली केवाईसी दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया। ‘श्री खाटू श्याम ट्रेडर्स’ और ‘ओम ट्रेडर्स’ जैसी फर्जी कंपनियों के जरिए पैसे का लेन-देन हुआ।

3. हवाला से पहुंची किश्तें

जांच में पता चला है कि वीरेंद्र राम ने महज दो महीने के भीतर हवाला नेटवर्क का इस्तेमाल कर 25 से 50 लाख रुपये की छोटी-छोटी किश्तों में कुल 5 करोड़ रुपये मुकेश मित्तल तक पहुँचाए थे।

भ्रष्टाचार की ‘जमीन’

ED का दावा है कि वीरेंद्र राम के पिता गेंदा राम के खाते में जो 4.30 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए गए, उसी रकम का इस्तेमाल दिल्ली में महंगी जमीन खरीदने के लिए किया गया था।

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