गिरिडीह मधुबन में मरांग बुरु दिसम मांझीथान पहुंचे पूर्व CM बाबुलाल मरांडी को मिला ताला बंद, भड़के : CM हेमंत सोरेन से की कार्रवाई की मांग
मधुबन प्रवास पर गए पूर्व मुख्यमंत्री को मरांग बुरु दिसम मांझीथान में लटका मिला ताला। चाभी BDO के पास होने पर भड़के पूर्व मुख्यमंत्री; मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से दोषी अफसरों पर कार्रवाई की मांग की, दी आंदोलन की चेतावनी।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!आकाश सिंह
गिरिडीह: संताल समाज के सर्वोच्च धार्मिक और आस्था के केंद्र ‘मरांग बुरु दिसम मांझीथान’ में ताला लगाए जाने का मामला अब पूरी तरह गरमा गया है। पूर्व मुख्यमंत्री जब खुद इस पावन स्थल पर पूजा-अर्चना और दर्शन करने पहुंचे, तो वहां मुख्य द्वार पर ताला लटका देख वे स्तब्ध रह गए। इस घटना के बाद से न सिर्फ संताल समाज, बल्कि राजनीतिक गलियारों में भी हड़कंप मच गया है। पूर्व मुख्यमंत्री ने इसे आदिवासियों की आस्था का खुला अपमान बताते हुए राज्य के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से दोषी अधिकारियों पर अविलंब कार्रवाई की मांग की है।
पूर्व मुख्यमंत्री को मिला ताला, बाबुलाल ने बयां किया दर्द
बाबुलाल मरांडी के अनुसार, अपने मधुबन प्रवास के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री सुबह ‘देवों के देव मरांग बुरु दिसम मांझीथान’ में शीश नवाने और पूजा-अर्चना करने पहुंचे थे। लेकिन वहां का नजारा देखकर हर कोई हैरान रह गया—मांझीथान के मुख्य द्वार पर सरकारी ताला जड़ा हुआ था।
जब उन्होंने इस बाबत स्थानीय ग्रामीणों से पूछताछ की, तो लोगों ने अत्यंत पीड़ा के साथ बताया कि मांझीथान की चाभी स्थानीय प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO) के पास रखी गई है। किसी सरकारी अधिकारी द्वारा आदिवासियों के आराध्य स्थल को इस तरह अपनी चौकसी और नियंत्रण में रखने की बात सामने आते ही पूर्व मुख्यमंत्री का आक्रोश फूट पड़ा। उन्होंने दो टूक कहा कि मांझीथान कोई सरकारी भवन नहीं, बल्कि संताल समाज की आत्मा, संस्कृति और पहचान का केंद्र है, जहाँ ताला लगाना कतई स्वीकार नहीं किया जा सकता।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से सीधे कार्रवाई की मांग
पूर्व मुख्यमंत्री ने इस बेहद संवेदनशील मामले को लेकर वर्तमान मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन @HemantSorenJMM को सीधे टैग कर सवाल उठाया कि आखिर किस परिस्थिति और किस कानून के तहत एक सरकारी पदाधिकारी ने आदिवासियों के आस्था केंद्र पर अपना कब्जा जमाया है? उन्होंने मुख्यमंत्री से मांग की है कि इस तानाशाहीपूर्ण निर्णय को लेने वाले जिम्मेदार अधिकारियों को चिन्हित कर उनके खिलाफ तत्काल सख्त से सख्त कार्रवाई की जाए। उन्होंने चेताया कि यदि झारखंड में ही आदिवासियों के धार्मिक स्थलों पर प्रशासन कब्जा जमाने लगेगा, तो आदिवासियों की समृद्ध परंपराओं और अधिकारों की रक्षा कौन करेगा?
दी गई बड़ी चेतावनी: “खुद संगठित होकर खुलवाएंगे ताला”
मामले की गंभीरता को देखते हुए पूर्व मुख्यमंत्री ने प्रशासन को स्पष्ट चेतावनी दी है कि:
मरांग बुरु दिसम मांझीथान में बिना किसी रुकावट के*नियमित पूजा-अर्चना बहाल की जाए।
परिसर का उचित रखरखाव सुनिश्चित हो।
संताल समाज की सदियों पुरानी परंपरा के अनुसार तत्काल ‘नायके’ (धार्मिक प्रधान/पुजारी) की गरिमापूर्ण नियुक्ति की जाए।
उन्होंने दो टूक लहजे में कहा कि यदि प्रशासन ने अपनी इस मनमानी को तुरंत दुरुस्त नहीं किया, तो अगली बार मधुबन आने पर वे स्वयं संताल समाज के लोगों को व्यापक रूप से संगठित करेंगे। समाज खुद आगे बढ़कर वहां का ताला खुलवाएगा और सामूहिक सहभागिता से नायके की नियुक्ति एवं आर्थिक सहयोग की एक स्थायी, स्वतंत्र व्यवस्था खड़ी करेगा।
“आस्था पर ताला लगाने वाले अधिकारियों को यह समझ लेना चाहिए कि संताल समाज अपने आराध्य और संस्कृति के सम्मान के लिए हर संघर्ष करने को तैयार है। इसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।” बाबुलाल मरांडी


















