'Mega-Strike' at Online Pharmacies

ऑनलाइन फार्मेसी पर ‘महा-हड़ताल’: देशभर के केमिस्ट शॉप बंद, झारखंड में में भी लोग दवा के लिए दिखे परेशान..

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झारखंड , 20 मई .. देशभर में अवैध और अनियंत्रित ऑनलाइन दवा बिक्री के खिलाफ केमिस्टों का आक्रोश चरम पर है। ऑल इंडिया ऑर्गेनाईजेशन ऑफ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स (AIOCD) के राष्ट्रव्यापी आह्वान पर बुधवार को झारखंड में भी दवा व्यवसायियों ने अपने प्रतिष्ठान बंद रखकर एक दिवसीय सांकेतिक हड़ताल की और सरकार को अपनी ताकत का अहसास कराया।

‘ई-फार्मेसी’ बनाम जनस्वास्थ्य: कहाँ है खतरा?

झारखंड केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स एसोसिएशन की अगुवाई में स्थानीय दवा दुकानदारों ने स्पष्ट किया कि यह लड़ाई केवल उनके व्यवसाय को बचाने की नहीं, बल्कि आम जनता की सुरक्षा की भी है। संगठन का मानना है की “बिना उचित मेडिकल पर्चे के दवाओं की होम डिलीवरी और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स द्वारा दी जाने वाली अंधी छूट न केवल स्वास्थ्य व्यवस्था को खोखला कर रही है, बल्कि दवाओं के दुरुपयोग (Drug Abuse) की संभावनाओं को भी बढ़ा रही है।”

केमिस्ट संगठनों का तर्क है कि भारत की विशाल जनसंख्या और दवाओं की संवेदनशीलता को देखते हुए, ऑनलाइन दवा बिक्री का मौजूदा मॉडल ‘हेल्थ इमरजेंसी’ को निमंत्रण दे सकता है। अब गेंद केंद्र सरकार के पाले में है कि वह तकनीक और छोटे व्यवसाय के बीच संतुलन कैसे बैठाती है।

प्रधानमंत्री को सौंपा ज्ञापन, दी चेतावनी

इस राष्ट्रव्यापी आंदोलन के तहत जमशेदपुर के केमिस्टों ने जिला उपायुक्त के माध्यम से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में मांग की गई है कि सरकार ई-फार्मेसी के लिए कड़े नियम लागू करे ताकि:

दवाओं की गुणवत्ता सुनिश्चित हो सके।
छोटे और लाइसेंसधारी केमिस्टों की आजीविका सुरक्षित रहे।
अवैध ऑनलाइन बिक्री पर लगाम लगे।

क्या देशव्यापी आंदोलन लेगा और उग्र रूप

हड़ताल के चलते झारखंड के लगभग सभी शहरों में आम लोगों को दवा के लिए मशक्कत करनी पड़ी रही है । हालांकि आपातकालीन सेवाओं को इससे मुक्त रखा गया है। जानकारों का मानना है कि यदि सरकार ने जल्द ही ऑनलाइन फार्मेसी कंपनियों की कार्यप्रणाली पर लगाम नहीं लगाई, तो देशभर के लाखों छोटे दवा विक्रेता इस आंदोलन को और उग्र रूप दे सकते हैं।

 

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