झारखंड के ‘युवा जननायक’ हेमंत सोरेन: विकास की नई इबारत और कल्याणकारी योजनाओं का दम
रांची: झारखंड की राजनीति में हेमंत सोरेन एक ऐसा नाम बन चुके हैं, जिन्होंने अपनी जनहितैषी नीतियों और दूरदर्शी फैसलों से राज्य की तस्वीर बदल दी है। उन्हें आज झारखंड का सबसे ‘युवा जननायक’ माना जाता है, जिन्होंने न केवल संकट के समय प्रदेश को संभाला, बल्कि विकास के ऐसे मॉडल पेश किए, जिनकी चर्चा पूरे देश में हो रही है। हम महज उन योजनाओं और कार्यो में से महज चंद चीजो की बात करेंगे। और आज से कोशिश करंगे की हेमंत सोरेन के विकास का लेखा जोखा जनता तक पहुँचाया जाए।
कोरोना काल में बने ‘मसीहा’
हेमंत सोरेन के नेतृत्व की सबसे बड़ी परीक्षा कोरोना काल के दौरान हुई थी। जब देश भर में लॉकडाउन के कारण लाखों मजदूर दूसरे राज्यों में फंस गए थे, तब सोरेन ने एक अभिभावक की तरह उनकी सुध ली। उन्होंने न केवल सुरक्षित आवागमन की व्यवस्था की, बल्कि इतिहास रचते हुए झारखंड के मजदूरों को हवाई जहाज से वापस लाकर देश के सामने मिसाल पेश की। यह कदम उनके लिए सत्ता से ऊपर जनसेवा को रखने का प्रमाण था।
ओल्ड पेंशन योजना’ से बदली सरकारी नौकरी की दिशा
हेमंत सोरेन सरकार का ‘ओल्ड पेंशन योजना’ (OPS) को लागू करने का निर्णय एक क्रांतिकारी कदम साबित हुआ है। इस फैसले ने पूरे देश का ध्यान खींचा है। इसकी लोकप्रियता का आलम यह है कि पड़ोसी राज्यों के प्रशासनिक अधिकारी भी झारखंड के प्रति आकर्षित हो रहे हैं। यह चर्चा का विषय है कि लोग अन्य राज्यों में छोटे पदों (जैसे CO) को छोड़कर, झारखंड में SDPO जैसे महत्वपूर्ण पदों पर सेवा देने को प्राथमिकता दे रहे हैं। यह सरकार की कर्मचारी-हितैषी नीतियों की बड़ी जीत है।
विदेशों में शिक्षा का सपना हुआ साकार
झारखंड के गरीब, अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के युवाओं के लिए ‘गुरुजी स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड’ और ‘विदेश में शिक्षा’ की योजनाएं एक वरदान बन गई हैं। आज राज्य के होनहार युवा सरकारी खर्चे पर विदेशों के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों में शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। हेमंत सरकार का मानना है कि यदि राज्य के गरीब युवाओं को संसाधन मिलें, तो वे विश्व स्तर पर झारखंड का नाम रोशन कर सकते हैं।
क्यों अलग है हेमंत का मॉडल?
समावेशी विकास: समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाना।
मजबूत प्रशासनिक ढांचा: ओल्ड पेंशन स्कीम और बेहतर कार्य संस्कृति से प्रशासन का मनोबल बढ़ना।
भविष्योन्मुखी दृष्टिकोण: शिक्षा और रोजगार को सीधे सरकार की प्राथमिकताओं से जोड़ना।
हेमंत सोरेन की कार्यशैली ने साबित कर दिया है कि यदि नीयत साफ हो, तो कठिन परिस्थितियों में भी एक समृद्ध और खुशहाल राज्य की नींव रखी जा सकती है। यही कारण है कि आज झारखंड का युवा उन्हें अपना सबसे भरोसेमंद चेहरा मानता है।

















