A New Chapter for Film and Acting in Jharkhand

झारखंड में फिल्म और अभिनय का नया अध्याय, आज होगा ऐतिहासिक MoU

राज्य को मिलेगा पहला फिल्म एवं टेलीविजन संस्थान, अब कलाकारों को नहीं जाना पड़ेगा दूसरे राज्यों में

A New Chapter for Film and Acting in Jharkhand

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नवीन कुमार 

रांची। झारखंड में फिल्म, अभिनय के क्षेत्र में एक बड़ा बदलाव होने जा रहा है। 22 जुलाई को झारखंड फिल्म डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड (JFDCL) और कोलकाता के प्रतिष्ठित सत्यजीत रे फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट (SRFTI) के बीच एक महत्वपूर्ण समझौता (MoU) होने जा रहा है। इस समझौते के साथ ही राज्य में पहली बार फिल्म एवं टेलीविजन संस्थान स्थापित करने की दिशा में औपचारिक शुरुआत होगी।

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मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की मौजूदगी में प्रोजेक्ट भवन में होने वाला यह समझौता केवल एक प्रशासनिक औपचारिकता नहीं, बल्कि झारखंड के फिल्म उद्योग और स्थानीय कलाकारों के लिए एक नए युग की शुरुआत माना जा रहा है।
यह संस्थान अभिनय, फिल्म निर्देशन, सिनेमेटोग्राफी, एडिटिंग, साउंड, पटकथा लेखन और अन्य तकनीकी क्षेत्रों में पेशेवर प्रशिक्षण देगा।

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झारखंड के युवाओं के लिए बड़ा अवसर

अब तक झारखंड के युवाओं को फिल्म और अभिनय की पढ़ाई के लिए मुंबई, पुणे, कोलकाता या दिल्ली जैसे शहरों का रुख करना पड़ता था। आर्थिक रूप से कमजोर लेकिन प्रतिभाशाली युवाओं के लिए यह अक्सर मुश्किल होता था। नया संस्थान इस दूरी को कम करेगा और राज्य में ही विश्वस्तरीय प्रशिक्षण का अवसर उपलब्ध कराएगा।

स्थानीय फिल्म उद्योग को मिलेगी नई ताकत

झारखंड प्राकृतिक सुंदरता, आदिवासी संस्कृति, लोककला और विविध भाषाओं का राज्य है। यहां नागपुरी, संथाली, खोरठा, कुरमाली सहित कई भाषाओं में फिल्में बनती हैं, लेकिन तकनीकी प्रशिक्षण और मजबूत संस्थागत व्यवस्था का अभाव लंबे समय से महसूस किया जा रहा था। यह संस्थान स्थानीय फिल्म उद्योग को प्रशिक्षित कलाकार, तकनीशियन और फिल्म निर्माता उपलब्ध कराएगा।

रोजगार और निवेश के भी खुलेंगे रास्ते

विशेषज्ञों का मानना है कि संस्थान शुरू होने के बाद केवल कलाकार ही नहीं, बल्कि कैमरा, एडिटिंग, साउंड, एनीमेशन, डिजिटल मीडिया और फिल्म निर्माण से जुड़े अनेक क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। साथ ही झारखंड फिल्म शूटिंग और फिल्म निवेश के लिए भी अधिक आकर्षक गंतव्य बन सकता है।

क्या हैं इसके मायने?

यह MoU केवल एक संस्थान की स्थापना तक सीमित नहीं है। यह झारखंड की फिल्म नीति को जमीन पर उतारने की दिशा में सबसे महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। यदि संस्थान समयबद्ध तरीके से स्थापित होता है, तो आने वाले वर्षों में झारखंड केवल प्राकृतिक लोकेशन वाला राज्य नहीं रहेगा, बल्कि फिल्म निर्माण और अभिनय का उभरता हुआ केंद्र भी बन सकता है।जानकारों की मानें तो राज्य सरकार का यह कदम आने वाले समय मे झारखंड में पर्यटन को बढाने में मिल का पत्थर साबित होगा।

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यही नहीं झारखंड के हजारों युवाओं के लिए यह समझौता एक ऐसा मंच तैयार करेगा, जहां उनकी प्रतिभा को पेशेवर प्रशिक्षण, पहचान और राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचने का अवसर मिलेगा। इस लिहाज से 22 जुलाई का दिन राज्य के सांस्कृतिक और रचनात्मक इतिहास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हो सकता है।

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