Shop destroyed by fire: Social worker Bharat Prasad rekindles hope and also provides assistance for the education of three daughters.

आग में उजड़ी दुकान, समाजसेवी भरत प्रसाद ने फिर जगाई उम्मीद, तीन बेटियों की पढ़ाई के लिए भी की मदद

Shop destroyed by fire: Social worker Bharat Prasad rekindles hope and also provides assistance for the education of three daughters.
Shop destroyed by fire: Social worker Bharat Prasad rekindles hope and also provides assistance for the education of three daughters.

शंभू कुमार सिंह 

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सिमडेगा: ठेठईटांगर मुख्यालय स्थित बाजार टांड़ में आग लगने से दुकान और लाखों रुपये का सामान गंवा चुकी शिल्पी देवी के परिवार के लिए शनिवार का दिन नई उम्मीद लेकर आया। समाजसेवी भरत प्रसाद ने मानवता की मिसाल पेश करते हुए पीड़ित महिला की दुकान में दोबारा आवश्यक सामान भरवाया, ताकि वह फिर से अपना कारोबार शुरू कर परिवार का भरण-पोषण कर सके। इसके साथ ही उनकी तीन बेटियों की पढ़ाई के लिए कॉपी-पेन भी उपलब्ध कराया।

कुछ दिन पूर्व देर रात करीब 2 से 3 बजे बाजार टांड़ स्थित शिल्पी देवी की गुमटी दुकान में अचानक आग लग गई थी। देखते ही देखते आग ने पूरी दुकान को अपनी चपेट में ले लिया और दुकान में रखा सामान जलकर राख हो गया। घटना के समय शिल्पी देवी अपने परिवार के साथ बाहर थीं। सोमवार सुबह करीब 10 बजे जब वह घटनास्थल पर पहुंचीं तो दुकान को पूरी तरह जला हुआ देखकर उनका रो-रोकर बुरा हाल हो गया।

शिल्पी देवी के पति स्वर्गीय ज्योतिष कुमार का निधन हो चुका है। ऐसे में वह अपनी तीन बेटियों की जिम्मेदारी संभाल रही हैं। दुकान ही परिवार की आजीविका का प्रमुख सहारा थी। आग की घटना के बाद परिवार के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया था और दुकान दोबारा शुरू करना उनके लिए मुश्किल हो गया था।

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परिवार की स्थिति की जानकारी मिलने के बाद समाजसेवी भरत प्रसाद ने मदद के लिए हाथ बढ़ाया। उन्होंने दुकान में लाखों रुपये की लागत का सामान दोबारा उपलब्ध कराया, जिससे शिल्पी देवी अब फिर से अपनी दुकान संचालित कर सकेंगी। साथ ही बच्चियों की पढ़ाई बाधित न हो, इसके लिए कॉपी-पेन भी उपलब्ध कराया गया।

इस अवसर पर भरत प्रसाद ने कहा कि मुसीबत किसी के जीवन में बताकर नहीं आती। ऐसे समय में जरूरतमंद के साथ खड़ा होकर उसके चेहरे पर दोबारा मुस्कान लाना ही सच्ची मानव सेवा है। उन्होंने कहा कि उनका प्रयास है कि पीड़ित परिवार फिर से अपने पैरों पर खड़ा हो और बच्चियों की पढ़ाई किसी भी परिस्थिति में न रुके।

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दुकान में दोबारा सामान मिलने के बाद शिल्पी देवी भावुक हो गईं। उन्होंने भरत प्रसाद का आभार जताते हुए कहा कि आग लगने के बाद उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि परिवार को कैसे संभालें और दुकान दोबारा कैसे शुरू करें। ऐसे कठिन समय में मिली मदद उनके लिए बहुत बड़ी राहत है।

स्थानीय लोगों ने भी भरत प्रसाद की इस पहल की सराहना की। लोगों का कहना है कि किसी जरूरतमंद को केवल आर्थिक सहायता देना ही नहीं, बल्कि उसे दोबारा अपने पैरों पर खड़ा करने की पहल करना समाज के लिए प्रेरणादायक है। आग में दुकान भले ही राख हो गई, लेकिन इस मदद ने शिल्पी देवी और उनकी तीन बेटियों के जीवन में फिर से उम्मीद जगा दी है।

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