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रांची: बिल्डिंग रेगुलराइजेशन स्कीम के 51 दिन बाद भी सुस्त रफ्तार, नियमों की पेचीदगियों में फंसी सरकारी योजना

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रांची: झारखंड सरकार द्वारा रांची सहित पूरे राज्य में बिना नक्शा बने भवनों को वैध करने के लिए लाई गई ‘बिल्डिंग रेगुलराइजेशन स्कीम’ की रफ्तार बेहद सुस्त बनी हुई है। योजना लागू हुए 51 दिन बीत चुके हैं, लेकिन अब तक मात्र 801 आवेदन ही प्राप्त हुए हैं। आवेदन करने की अंतिम तिथि 27 जून निर्धारित है, ऐसे में इतनी कम संख्या सरकारी महकमे के लिए चिंता का विषय बनी हुई है।

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कहां कितने आवेदन?

प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, कुल 801 आवेदनों में से:

रांची नगर निगम: 671 आवेदन।

आरआरडीए (RRDA): 130 आवेदन।

क्यों नहीं मिल रहा उम्मीद के मुताबिक रिस्पांस?

आर्किटेक्ट्स और स्थानीय निवासियों का मानना है कि योजना का उद्देश्य जनहित में है, लेकिन इसकी जटिल शर्तें लोगों के लिए गले की हड्डी बन गई हैं। लोग निम्नलिखित कारणों से आवेदन करने से डर रहे हैं:

1. प्लॉट एरिया की सीमा: स्कीम के तहत केवल 300 वर्गमीटर (3228 वर्गफीट) तक के भूखंड पर जी+2 (G+2) तक के नक्शे को मंजूरी मिलेगी। इससे अधिक क्षेत्रफल वाली जमीन पर बना छोटा मकान भी इस दायरे से बाहर हो जाता है। इसका सबसे ज्यादा असर उन आदिवासी और मूलवासी परिवारों पर पड़ रहा है, जिनके पास बड़ी जमीन है लेकिन उन्होंने कम निर्माण किया है।

2. सड़क चौड़ाई की शर्त: भवन के समीप सड़क की चौड़ाई 25 फीट से कम होने पर जगह छोड़ने का अनिवार्य प्रावधान है। इसके कारण लोगों को डर है कि आवेदन करने पर उन्हें अपने बने-बनाए मकान के हिस्से को तोड़ना पड़ सकता है।

3. सेट बैंक (Set-back) का डर: आवेदन के दौरान साइड, फ्रंट और रियर सेट बैंक की जानकारी भरना अनिवार्य है। आवेदकों को आशंका है कि यदि वे इसे भरते हैं, तो उन्हें कानूनी तौर पर अपना निर्माण तोड़ना ही पड़ेगा।

क्या प्रशासन देगा राहत?

रांची नगर निगम क्षेत्र में अवैध भवनों की संख्या 1.50 लाख से अधिक है। आरआरडीए द्वारा लोगों को जागरूक करने के लिए अब तक रिंग रोड और आसपास के इलाकों में 2 लाख से अधिक पंपलेट बांटे जा चुके हैं, फिर भी कागजात सही होने के बावजूद लोग आवेदन करने से बच रहे हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक सड़क चौड़ाई और प्लॉट साइज से जुड़े नियमों को सरल नहीं किया जाता, तब तक आवेदन की संख्या में बड़ा उछाल आना मुश्किल है। अब देखना यह होगा कि 27 जून की डेडलाइन नजदीक आते ही क्या सरकार नियमों में कोई ढील देती है या फिर यह योजना फाइलों तक ही सीमित रह जाएगी।

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