झारखंड राज्यसभा चुनाव: कांग्रेस की हार के बाद सहयोगी दलों पर आरोप-प्रत्यारोप, भाकपा (माले) ने किया पलटवार

रांची : झारखंड में हाल ही में हुए राज्यसभा चुनाव 2026 के परिणामों के बाद राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। कांग्रेस उम्मीदवार प्रणव झा की हार के बाद पार्टी ने अपने ही सहयोगी दलों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। वहीं, सहयोगी दलों की ओर से भी कांग्रेस पर पलटवार किया गया है, जिससे गठबंधन की अंदरूनी खींचतान खुलकर सामने आ गई है।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!कांग्रेस के झारखंड प्रभारी के. राजू ने चुनाव परिणाम पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि कांग्रेस उम्मीदवार को कांग्रेस के 16 विधायकों और झामुमो के 4 विधायकों का समर्थन मिला था। उन्होंने आरोप लगाया कि गठबंधन धर्म का पालन सभी सहयोगी दलों ने नहीं किया, जिसके कारण पार्टी उम्मीदवार को हार का सामना करना पड़ा। के. राजू ने विशेष रूप से राजद और भाकपा (माले) पर निशाना साधते हुए कहा कि इन दलों के रवैये ने कांग्रेस को नुकसान पहुंचाया और अपेक्षित समर्थन नहीं मिल सका।
वहीं, भाकपा (माले) की ओर से इन आरोपों को सिरे से खारिज किया गया है। पार्टी के झारखंड राज्य सचिव मनोज भक्त ने बयान जारी कर कहा कि पार्टी के दोनों विधायकों—अरूप चटर्जी और चंद्रदेव महतो—ने कांग्रेस उम्मीदवार प्रणव झा के पक्ष में मतदान किया है। मनोज भक्त ने बताया कि मतदान प्रक्रिया के दौरान पार्टी के अधिकृत एजेंट भी मौजूद थे, जिनमें पोलित ब्यूरो सदस्य कॉ. हलधर महतो और केंद्रीय कमिटी सदस्य कॉ. गीता मंडल शामिल थीं। उन्होंने कहा कि पूरी प्रक्रिया में पार्टी की ओर से मतदान की पुष्टि की गई है।
भाकपा (माले) ने कांग्रेस के आरोपों को “भ्रम फैलाने वाला” बताते हुए कहा कि चुनाव परिणामों की जिम्मेदारी से बचने के लिए कांग्रेस अनावश्यक बयानबाजी कर रही है। मनोज भक्त ने आरोप लगाया कि कांग्रेस अपने ही विधायकों को एकजुट रखने में विफल रही और अब अपनी कमजोरियों को छिपाने के लिए सहयोगी दलों पर आरोप मढ़ रही है।















