राज्यसभा चुनाव पर JMM का बड़ा दांव: दोनों सीटों पर उम्मीदवार उतारने का संकेत, हेमंत सोरेन को मिला अंतिम फैसला लेने का अधिकार
नवींन कुमार
रांची: झारखंड में राज्यसभा की दो रिक्त सीटों पर होने वाले चुनाव को लेकर झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) ने बड़ा राजनीतिक संकेत दिया है। पार्टी की एक महत्वपूर्ण बैठक के बाद मंत्री योगेंद्र महतो ने स्पष्ट कर दिया है कि झामुमो इन दोनों सीटों पर अपना दावा मजबूती से पेश करेगी।
बैठक में बनी सहमति, हेमंत सोरेन को सौंपी कमान
पार्टी कार्यालय में हुई बैठक के बाद योगेंद्र महतो ने बताया कि झामुमो के सभी विधायक, सांसद और मंत्री इस बात पर एकमत हैं कि दोनों राज्यसभा सीटों पर झामुमो का ही उम्मीदवार होना चाहिए। पार्टी ने इस पूरी प्रक्रिया में एकरूपता बनाए रखने के लिए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को अधिकृत कर दिया है। अब राज्यसभा उम्मीदवार के नाम का अंतिम चयन मुख्यमंत्री ही करेंगे।
गठबंधन में खींचतान?
इस घोषणा के साथ ही सत्ताधारी गठबंधन के भीतर सीटों के बंटवारे को लेकर सस्पेंस बढ़ गया है। गठबंधन में शामिल कांग्रेस भी एक सीट पर अपना प्रत्याशी उतार दिया है।
इस पर प्रतिक्रिया देते हुए झामुमो विधायकों ने कहा कि पार्टी की भावना से मुख्यमंत्री को अवगत करा दिया गया है। कांग्रेस द्वारा बिना मुख्यमंत्री की सहमति के उम्मीदवार के नाम पर घोषणा करने के पार्टी नेताओं ने असहमति जताई है। विधायकों का कहना है कि गठबंधन का स्वरूप और सीटों का तालमेल पार्टी नेतृत्व के स्तर पर तय होगा, और वर्तमान स्टैंड यही है कि दोनों सीटों पर झामुमो के प्रत्याशी ही चुनाव लड़ें।
संख्या बल के हिसाब से झामुमो की स्थिति
झारखंड विधानसभा के मौजूदा समीकरणों के अनुसार, एक राज्यसभा सीट जीतने के लिए कुल 28 विधायकों के समर्थन की आवश्यकता है। वर्तमान सत्ताधारी गठबंधन (JMM, कांग्रेस, राजद और सीपीआई-एमएल) के पास पर्याप्त संख्या बल है, जिससे वे दोनों सीटें आसानी से जीत सकते हैं। हालांकि, गठबंधन के अंदर कांग्रेस की उम्मीदवार की घोषणा और झामुमो के रुख के कारण मामला रोचक हो गया है।
अब सभी की निगाहें मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर टिकी हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि गठबंधन की स्थिरता बनाए रखने के लिए मुख्यमंत्री को कांग्रेस और झामुमो की आकांक्षाओं के बीच संतुलन बनाना होगा। नामांकन की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, ऐसे में अगले एक दो दिनों में दोनों दलों की ओर से क्या कदम उठाए जाते है यह देखना काफी रोचक होगा।
जाहिर है की झारखंड में राज्यसभा चुनाव केवल एक सीट का मुकाबला नहीं है, बल्कि यह विधानसभा चुनावों से पहले महागठबंधन की एकजुटता का ‘लिटमस टेस्ट’ भी है। क्या प्रणव झा का नाम झामुमो-कांग्रेस के रिश्तों को और प्रगाढ़ करेगा या BJP इसमें सेंधमारी का मौका खोज लेगी? 18 जून का फैसला ही तय करेगा कि राज्य की राजनीति की अगली पटकथा कौन लिखेगा।
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