राज्यसभा चुनाव का JMM का तंज : 16 वाला भी सपना देख रहा है और 21 वाला भी सपना देख रहा है
रांची: झारखंड में राज्यसभा चुनाव में महज कुछ दिन शेष है लेकिन राज्य के सत्तारूढ़ महागठबंधन (JMM-कांग्रेस) के भीतर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कांग्रेस के रुख पर कड़े सवाल खड़े किए हैं, जिससे गठबंधन के भीतर मतभेदों की अटकलें शुरू हो गई हैं।
कांग्रेस को अपना दायरा समझना चाहिए”
सुप्रियो भट्टाचार्य ने कांग्रेस को नसीहत देते हुए कहा कि कांग्रेस एक स्वतंत्र राजनीतिक दल है, लेकिन उनके पास संख्या बल इतना नहीं है कि वे अपने दम पर निर्णय ले सकें। भट्टाचार्य ने कहा, “बेहतर होता कि इस मुद्दे पर निर्णय मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन लेते और कांग्रेस अपनी बात उनके समक्ष रखती। गठबंधन के सहयोगियों को ठेस पहुंचाकर लिए गए कदम उचित नहीं हैं।”
“गठबंधन धर्म और त्याग की याद”
भट्टाचार्य ने स्पष्ट किया कि जेएमएम की पहली प्राथमिकता झारखंड की जनता है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, “16 वाला भी सपना देख रहा है और 21 वाला भी सपना देख रहा है,” यानी सभी दल अपनी-अपनी राजनीतिक गणनाओं में व्यस्त हैं। साथ ही, उन्होंने कांग्रेस को याद दिलाया कि अतीत में जेएमएम ने कई बार गठबंधन धर्म निभाते हुए कांग्रेस के लिए राजनीतिक त्याग किए हैं।
जाहिर है राज्यसभा चुनाव में उम्मीदवारों के नाम तय करने की प्रक्रिया जैसे-जैसे करीब आ रही है, वैसे-वैसे महागठबंधन में ‘शक्ति प्रदर्शन’ और मोलभाव (Bargaining) तेज हो रही है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जेएमएम के इस तीखे बयान पर कांग्रेस की ओर से क्या प्रतिक्रिया आती है और क्या यह विवाद गठबंधन में कोई दरार पैदा करेगा या पर्दे के पीछे कोई सुलह का फॉर्मूला निकाला जाएगा।
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