नागपुरी फिल्म ‘सेरेंग’ व एल्बम में अश्लीलता एवं आदिवासी समाज के अपमान के आरोप, केंद्रीय सरना समिति ने की कड़ी कार्रवाई की मांग

रांची : आज होटल गंगा आश्रम में केंद्रीय सरना समिति के तत्वावधान में एक प्रेस वार्ता आयोजित की गई, जिसमें झारखंड में निर्मित नागपुरी फिल्म ‘सेरेंग’ एवं कुछ नागपुरी एल्बमों पर कथित रूप से अश्लीलता फैलाने और आदिवासी समाज की छवि को ठेस पहुंचाने के आरोप लगाए गए।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!केंद्रीय सरना समिति के अध्यक्ष बबलू मुंडा ने कहा कि फिल्म ‘सेरेंग’ में आदिवासी समाज से जुड़ी भावनाओं एवं सांस्कृतिक मूल्यों के विपरीत दृश्य प्रस्तुत किए गए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि फिल्म में सामाजिक सौहार्द को प्रभावित करने वाले विषयों को दिखाया गया है तथा आदिवासी समुदाय की परंपराओं पर प्रतिकूल टिप्पणी की गई है।
उन्होंने बताया कि इस मामले को लेकर समिति के प्रतिनिधिमंडल ने पूर्व में राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग की सदस्य डॉ. आशा लकड़ा से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा था। इसके बाद आयोग द्वारा केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC), मुंबई तथा सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार को पत्र भेजकर सात दिनों के भीतर संबंधित मामले पर कार्रवाई एवं जानकारी उपलब्ध कराने को कहा गया है।
बबलू मुंडा ने कहा कि यदि इसके बावजूद नागपुरी फिल्म एवं एल्बमों में कथित अश्लीलता और सांस्कृतिक विरूपण जारी रहता है, तो समिति द्वारा सामाजिक स्तर पर विरोध दर्ज कराया जाएगा।
मुख्य पाहन जगलाल पाहन ने कहा कि फिल्म निर्माण के दौरान आदिवासी समाज की संस्कृति, परंपरा और सम्मान का विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए। वहीं प्रधान महासचिव अशोक मुंडा ने आरोप लगाया कि इस प्रकार की सामग्री आदिवासी समाज की सामाजिक और सांस्कृतिक पहचान को प्रभावित कर सकती है। संदीप उरांव ने भी फिल्म में आदिवासी समाज के चरित्र चित्रण पर आपत्ति जताते हुए इसे गंभीर विषय बताया।
इस प्रेस वार्ता में केंद्रीय सरना समिति के अध्यक्ष बबलू मुंडा, मुख्य पाहन जगलाल पाहन, प्रधान महासचिव अशोक मुंडा, महासचिव महादेव टोप्पो, जगन्नाथ तिर्की, संदीप उरांव, अनीता गाड़ी, सुरेंद्र लिंडा, आकाश मुंडा, विशाल मंडा सहित कई पदाधिकारी उपस्थित रहे।
















